चंडीगढ़ , जुलाई 25 -- केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने पर पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने स्कूल बस में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने, बिना कंडक्टर के बस चलाने और खुले दरवाजे के साथ संचालन को गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए चंडीगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग और ट्रैफिक पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
दोनों विभागों को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये गये हैं। मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर 2026 को होगी।
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को जतिंदर सिंह शंटी नया गांव पुलिस थाने के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर सीएच-01-टीए-5163 नंबर की एक स्कूल बस पर पड़ी। बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे सवार थे और चालक तेज रफ्तार में बस को जिगजैग तरीके से चला रहा था, जिससे बच्चों सहित अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गयी।
आयोग के सदस्य ने बस रुकवाकर चालक अमरिंदर सिंह से पूछताछ की। चालक ने बताया कि कंडक्टर छुट्टी पर है। जांच के दौरान बस का दरवाजा भी खुला मिला। इस पर चालक ने कहा कि दरवाजा खराब होने के कारण ठीक से बंद नहीं हो रहा था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि खुले दरवाजे के साथ, बिना कंडक्टर और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर स्कूल बस चलाना गंभीर लापरवाही है। ऐसी स्थिति में अचानक ब्रेक लगने या वाहन का संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता था। आयोग ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
आयोग ने इसे सुरक्षित वाहन नीति का स्पष्ट उल्लंघन बताया और कहा कि स्कूल बसों में निर्धारित क्षमता, कंडक्टर की उपलब्धता और सभी सुरक्षा उपकरणों का सही स्थिति में होना अनिवार्य है। इन नियमों की अनदेखी बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है।
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