सुकमा , जून 18 -- छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से विभिन्न मंत्रों के जप को अनिवार्य किए जाने के निर्णय को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बस्तरिया राज मोर्चा के नेता तथा पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे विद्यार्थियों पर थोपे जाने वाला कदम बताया है।

गुरुवार को यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में कुंजाम ने कहा कि स्कूलों में सुबह से लेकर छुट्टी तक अलग-अलग समय पर कुल 10 मंत्रों का जप कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के अलावा दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, महापुरुषों की जीवनी का वाचन, मध्याह्न भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र तथा शांति मंत्र को भी दैनिक कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और शिक्षकों के सामने भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उनके अनुसार शिक्षकों को यह तय करने में कठिनाई हो रही है कि वे अधिक समय इन गतिविधियों में दें या नियमित शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

पूर्व विधायक ने इस आदेश को संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां सभी धर्मों का समान सम्मान किया जाता है। उनका दावा है कि इस प्रकार की अनिवार्य व्यवस्था संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

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