नैनीताल , मई 27 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की नई दिल्ली की प्रधान पीठ ने स्कूलों, अस्पतालों और आवासीय क्षेत्रों के निकट पेट्रोल पंप स्थापित करने के मामलों में पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों के सख्त पालन को अनिवार्य बताते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मंगलवार को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइंस बाध्यकारी हैं और उनका हर हाल में पालन किया जाना चाहिए। आदेश की प्रति बुधवार को मिली है।

यह आदेश रोशन जोशी बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य में पारित किया गया। मामले में देहरादून के रायपुर क्षेत्र में इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के प्रस्तावित पेट्रोल पंप की वैधता को चुनौती दी गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप एक स्कूल, पशु चिकित्सालय और नहर के अत्यधिक निकट स्थापित किया जा रहा है, जिससे सीपीसीबी के दूरी संबंधी मानकों का उल्लंघन हो रहा है। सुनवाई के दौरान अधिकरण के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप की वितरण इकाई और स्थानीय स्कूल के बीच दूरी लगभग 36 से 40 मीटर के बीच है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में न्यूनतम 50 मीटर दूरी आवश्यक मानी गई है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यदि 50 मीटर की दूरी उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो 30 से 50 मीटर के बीच पेट्रोल पंप केवल तभी स्थापित किया जा सकता हैजब पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा निर्धारित अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया जाए। इन उपायों में दो मीटर ऊंची आरसीसी सुरक्षा दीवार, भूमिगत टैंकों के लिए कंक्रीट पिट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में पेट्रोल पंप और स्कूल अथवा अन्य संवेदनशील संस्थानों के बीच दूरी 30 मीटर से कम नहीं हो सकती।

फैसले में न्यायाधिकरण ने सीपीसीबी गाइडलाइन की महत्वपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा कि "10 बिस्तरों एवं उससे अधिक वाले अस्पताल" का आशय मानव अस्पताल से है न कि पशु चिकित्सालयों से। इसी आधार पर पशु चिकित्सालय को लेकर उठाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान पीईएसओ ने बताया कि प्रस्तावित स्थल को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं दी गई है। संस्था ने दस्तावेजों में कई कमियां और साइट प्लान में विसंगतियों की ओर भी न्यायाधिकरण का ध्यान आकर्षित किया। एनजीटी ने पीसीएसओ को निर्देश दिया कि वह स्कूल और नहर से संबंधित दूरी मानकों का स्वतंत्र सत्यापन करे तथा सीपीसीबी मानकों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के बाद ही अंतिम मंजूरी प्रदान करे।

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