रांची , सितंबर 16 -- स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) झारखंड राज्य कमिटी ने पाकुड़ जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) द्वारा सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों के जाने तथा विद्यालय की गतिविधियों की फोटो-वीडियो बनाए जाने को लेकर जारी किए गए निर्देश पर कड़ी आपत्ति जताई है।
एसएफआई के राज्य संयोजक कॉमरेड दानिश ने कहा कि "स्कूल बचाओ अभियान" का उद्देश्य किसी विद्यालय या शिक्षक को बदनाम करना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति, विद्यार्थियों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों को सामने लाना है। यदि विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की समस्याओं को सार्वजनिक रूप से देखने और दर्ज करने पर रोक लगाई जाएगी, तो यह पारदर्शिता के सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने आने से आखिर किसे परेशानी है? विद्यार्थियों और अभिभावकों से जुड़े सवालों का समाधान रोक लगाने से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और संवाद से होगा।
एसएफआई राज्य संयोजक ने कहा कि यदि किसी विद्यालय में प्रवेश, विद्यार्थियों की निजता या सुरक्षा को लेकर प्रशासन को कोई चिंता है, तो उसके लिए स्पष्ट और उचित नियम बनाए जा सकते हैं। लेकिन शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को देखने और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों को सामने रखने के हर प्रयास को रोकना उचित नहीं है।
एसएफआई ने डीईओ से मांग की है कि इस आदेश की समीक्षा की जाए और ऐसा कोई निर्देश न दिया जाए जिससे सरकारी विद्यालयों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो।
एसएफआई झारखंड राज्य कमिटी विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार, पारदर्शिता और बेहतर सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए अपना अभियान जारी रखेगी।
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