शिमला , मई 20 -- हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा रैंकिंग में एक बड़ी छलांग लगायी है और शिक्षा मंत्रालय की प्रदर्शन श्रेणी सूचकांक (पीजीआई) 2.0 रिपोर्ट में सात स्थानों के सुधार करते हुए 13वें से छठे स्थान पर पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुधारों पर दिये गये ध्यान को दिया। उन्होंने कहा कि राज्य ने राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान भी हासिल किया है और इसे प्रतिष्ठित 'प्रचेष्टा-2' श्रेणी में रखा गया है, जो हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। शिक्षा विभाग के शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों को बधाई देते हुये श्री सुक्खू ने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुये कई सुधार किये हैं।
पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पर्याप्त कर्मचारियों या बजटीय सहायता के बिना स्कूल खोले गये, जिससे राज्य में शैक्षिक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है। श्री सुक्खू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना और उन्हें आत्मविश्वासी तथा सक्षम बनाना है।
सरकार द्वारा की गयी पहलों का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि राज्य भर के सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा शुरू की गयी है। उन्होंने कहा कि स्कूल के संसाधनों का अधिक कुशलता से प्रबंधन किया जा रहा है और छात्रों के घरों के करीब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों का अध्ययन करने और हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में बेहतर शिक्षण विधियों को अपनाने के लिए शिक्षकों को विदेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेधावी छात्रों को भी विदेशी शैक्षणिक दौरों पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों के पदों को भर रही है ताकि स्टाफ की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो।
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