नयी दिल्ली , अक्टूबर 14 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को इनोवेशन इन साइंस परसूट फॉर इंस्पायर्ड रिसर्च' (इंस्पायर) मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नॉलेज) के 12वें राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता (एनएलईपीसी) में 62 युवा नवोन्मेषकों को सम्मानित किया।

डॉ. सिंह ने कहा कि देश के स्कूली छात्र अब अपने वैज्ञानिक विचारों को बाजार में बिकने वाले उत्पादों और उद्यमों में बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 25 छात्र अपने उत्पाद बाजार में उतार चुके हैं, जबकि युवा नवोन्मेषकों ने लगभग 250 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) हासिल किये हैं।उन्होंने प्रदर्शनी में प्रस्तुत विभिन्न परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर उनके वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं। इनमें शराब का पता चलने पर वाहन को स्टार्ट होने से रोकने वाली एआई आधारित प्रणाली, पानी बचाने वाली अल्ट्रासोनिक वाशिंग मशीन, आवारा कुत्तों को दूर रखने के लिए कंपन आधारित उपकरण और दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए सहायक तकनीक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों की ये परियोजनाएं दर्शाती हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर स्कूली स्तर के विचार भी व्यावहारिक उत्पादों तथा व्यावसायिक उद्यमों का रूप ले सकते हैं। उन्होंने इन नवाचारों को उद्योगों से जोड़ने, कारोबार-से-कारोबार संवाद बढ़ाने और विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से मार्गदर्शन दिलाने पर जोर दिया, ताकि उनकी परियोजनाएं केवल प्रदर्शनियों तक सीमित न रहें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विस्तारित हुआ है। वर्ष 2014 में देश में लगभग 350-400 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब करीब 2.5 लाख हो गयी है। इनमें लगभग 60 प्रतिशत टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि युवा नवोन्मेषकों को अपने उत्पादों को बेहतर बनाने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए उद्योगों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ काम करने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए सुझाव दिया कि प्रतियोगिता के आगामी संस्करणों में अभिभावकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि वे बच्चों के नवाचारों को समझ सकें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने भी कहा कि विद्यार्थियों की परियोजनाएं कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा, जल बचत और दिव्यांगजनों की सहायता सहित विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान की क्षमता रखती हैं।

डॉ. सिंह ने युवा नवोन्मेषकों को लगातार प्रयोग करने, नए विचारों को विकसित करने और सीखते रहने का आह्वान करते हुए कहा कि स्कूली स्तर पर प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना विकसित भारत के लक्ष्य और देश के नवाचार तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

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