रायपुर , मार्च 11 -- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम में हुए खर्च और टेंडर प्रक्रिया को लेकर बुधवार को यहां विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कार्यक्रम में खर्च हुई राशि, टेंडर रद्द कर दोबारा जारी करने और संभावित अनियमितताओं को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री से जवाब मांगा।
कांग्रेस ने मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए इसकी जांच के लिए विधायकों की समिति गठित करने की मांग भी की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।
प्रश्नकाल के दौरान श्री पटेल ने पूछा कि पहले जारी किए गए टेंडर को रद्द कर नया टेंडर क्यों निकाला गया। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि शुरुआती टेंडर की शर्तें काफी जटिल थीं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर भागीदारी संभव नहीं हो पा रही थी। इसी वजह से शर्तों में संशोधन कर नया टेंडर जारी किया गया।
मंत्री ने बताया कि भारत स्काउट-गाइड की राष्ट्रीय इकाई द्वारा आयोजन की सहमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने लगभग पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराए। इसके बाद जेम पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई थी। हालांकि आयुक्त कार्यालय से यह पत्र प्राप्त हुआ था कि जेम पोर्टल के जरिए कुछ खरीद संभव नहीं है।
इस पर कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से टेंडर की शर्तों को आसान बनाया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पिछले वर्ष 24 दिसंबर को टेंडर जारी होने और तीन जनवरी 2026 को अंतिम तिथि तय होने के बावजूद क्या इससे पहले ही काम शुरू हो गया था। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि स्काउट-गाइड परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद चल रहा है और मामला न्यायालय में लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इस पर रोक लगाने की जरूरत है।
श्री यादव ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सभी प्रक्रियाएं जेम पोर्टल के माध्यम से की गई हैं, जहां भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत स्काउट-गाइड की राष्ट्रीय टीम पहले से स्थल पर पहुंचकर अपने हिस्से की तैयारियां शुरू कर चुकी थी।
उन्होंने कहा कि बालोद में आयोजित जंबूरी के लिए क्रॉसिंग एरिना, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, टेंट और डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय तथा प्रिंटिंग समेत अन्य व्यवस्थाओं पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि जंबूरी से जुड़े कार्यों के लिए मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को पांच करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर दिया गया था। टेंडर शर्तों को तय करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था और सरकार के पास अब तक किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने की कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
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