नैनीताल , मार्च 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र स्थित जखोल ग्राम के पौराणिक सोमेश्वर महादेव मंदिर की मरम्मत को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सर्वे ऑफ इंडिया को अपनी जांच रिपोर्ट की प्रति सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 18 मार्च की तिथि निर्धारित की है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस दिन अदालत ने मंदिर में मरम्मत कार्य पर रोक लगाई थी, उसी रात कुछ लोगों ने मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया। ऐसे में सर्वे ऑफ इंडिया ने अदालत में जो जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसकी प्रति याचिकाकर्ता एवं अन्य पक्षकारों को भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस पर अदालत ने सर्वे ऑफ इंडिया को रिपोर्ट की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

यह जनहित याचिका सोमेश्वर महादेव मंदिर समिति के संयुक्त सचिव रामलाल विश्वकर्मा की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि मोरी के जखोल गांव स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर सदियों पुराना पौराणिक मंदिर है, जहां पांडवों द्वारा पूजा किए जाने की मान्यता है। वर्ष 1861 में यहां आकर्षक नक्काशी युक्त मूर्ति की स्थापना की गई थी। इस मंदिर में आसपास के 22 गांवों के ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भी गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि स्थानीय लोग लंबे समय से मंदिर की मरम्मत पुरातत्व विभाग से कराने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य स्थानीय देव शिल्पियों द्वारा ही कराया जाना चाहिए, जबकि हंस फाउंडेशन द्वारा बाहरी मिस्त्रियों से यह कार्य कराने की तैयारी की जा रही है।

मंदिर समिति ने इस संबंध में हंस फाउंडेशन के समक्ष विरोध दर्ज कराया था और संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज को भी ज्ञापन दिया था। इसके बाद मंत्री ने मामले की जांच के लिए विभागीय सचिव को निर्देश दिए थे। याचिका में मंदिर की पारंपरिक शैली के विपरीत किए जा रहे मरम्मत कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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