भोपाल , मई 7 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है तथा सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से अधिक प्रभावी होती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से 'सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' के प्रथम जत्थे को झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह यात्रा 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत निकाली जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में कई बार सोमनाथ मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ पुनः खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 मंदिर के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वर्ष 1026 में हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण हुए हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है और सांस्कृतिक जागरण का अभियान राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति "जियो और जीने दो" के सिद्धांत पर आधारित है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देश की 21 नदियों के जल कलशों का पूजन किया तथा श्रद्धालुओं को जल कलश और ध्वजा भेंट की। यात्रियों ने मुख्यमंत्री को शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया।
इस यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। भोपाल, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, नीमच, मंदसौर और आगर-मालवा सहित विभिन्न जिलों के श्रद्धालुओं को लेकर ट्रेन 8 मई को सोमनाथ पहुंचेगी। श्रद्धालु सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का 21 नदियों के जल से अभिषेक करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागी होंगे। यह यात्रा सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के संकल्प की सिद्धि का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी आरंभ की गई है तथा प्रदेश में 13 धार्मिक लोक विकसित किए गए हैं। महाकाल महालोक के निर्माण से उज्जैन की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति मिली है। कार्यक्रम में विधायक रामेश्वर शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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