विद्या शंकर राय सेलखनऊ , मई 12 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीद एक वर्ष तक टालने की अपील के बाद उत्तर प्रदेश का सर्राफा कारोबार चिंता में आ गया है। अनुमान है कि इससे उत्तर प्रदेश में करीब 35 लाख लोग प्रभावित होंगे।

कारोबारियों ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा है कि सरकार एक रोडमैप तैयार करे जिससे प्रभावित होने वाले लोगों को संकट से उबारा जा सके।

आदीश कुमार जैन सर्राफ लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लेकर कहा, " प्रधानमंत्री जी जब बिहार में गमछा लहराते हैं तो सत्ता बदल जाती है, बंगाल में झाल मूढ़ी खाते हैं तो सत्ता इधर से उधर हो जाती है । कहने का मतलब है कि वो देश के राजा हैं। उनकी बात सब मानते हैं। सराफा कारोबारी हमेशा राष्ट्रवादी होता है। वह राष्ट्र प्रथम के भाव से काम करता है लेकिन उसके साथ लाखों लोग जो इस कारोबार से जुड़े हैं उनका क्या होगा।"उन्होंने कहा कि ज्वैलरी के कारोबार से लाखों लोगों का परिवार जुड़ा हुआ है । धंधा बंद होने पर वो लोग कहां जायेंगे । उनके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा और कौन करेगा। अच्छा होगा कि सरकार इन बातों को भी ध्यान में रखकर एक रोडमैप तैयार करे। सर्राफा कारोबारी सरकार का साथ देने के लिए तैयार हैं ।

वहीं, कारोबारियों ने आशंका जताई है कि यदि सोने की मांग में गिरावट आती है तो इसका सीधा असर लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा। कारोबारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े आभूषण बाजारों में शामिल है और राष्ट्रीय आभूषण कारोबार में प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है। प्रदेश में करीब छह लाख सर्राफा कारोबारी, तीन लाख कारीगर और एक लाख से अधिक सहायक व्यापारी इस व्यवसाय से जुड़े हैं।

इसके अलावा लगभग 25 लाख कर्मचारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार पर निर्भर हैं। ऐसे में कुल मिलाकर करीब 35 लाख लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यूपी में प्रतिदिन करीब 500 किलो सोने की बिक्री होती है। यदि खरीद टालने का माहौल बनता है तो मांग में 50 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। इसका असर सिर्फ ज्वेलरी कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शादी-विवाह, होटल, खानपान, आयोजन प्रबंधन और पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई देगा।

वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और मथुरा जैसे धार्मिक एवं पर्यटन शहरों में शादी और पर्यटन आधारित कारोबार बड़ी संख्या में आभूषण खरीद पर निर्भर रहता है। ऐसे में बाजार की मंदी छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए चुनौती बन सकती है। सर्राफा कारोबारियों ने सरकार से मांग की है कि मांग को कम करने के बजाय देश में मौजूद निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाने की नीति बनाई जाए।

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