सोनीपत, सितंबर 14 -- हरियाणा के सोनीपत में वर्ष 2004 में अधिग्रहित जमीन के बकाया मुआवजे के लिए 12 किसान परिवार पिछले 22 वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों की कथित टालमटोल से क्षुब्ध सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम ने मंगलवार से परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया है।
प्रेम के अनुसार, वर्ष 2004 में किसानों की जमीन 5.80 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से अधिग्रहित की गई थी। किसान मुआवजे की बढ़ी दर के लिए अदालत पहुंचे। वर्ष 2012-13 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में फैसला देते हुए 3.60 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने के आदेश दिए। बाद में एचएसवीपी की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने गांव के अन्य किसानों को दिए गए 5.80 लाख रुपये प्रति एकड़ के आधार पर फैसला सुनाया।
किसानों का दावा है कि अधिकांश मुआवजा मिल चुका है, लेकिन 12 परिवारों की करीब 1.5 करोड़ रुपये की राशि पिछले तीन वर्षों से लंबित है। आरोप है कि पटवारी नवीन कौशिक और कानूनगो जगबीर राशि जारी कराने के नाम पर लगातार आश्वासन और तारीखें दे रहे हैं।
गौतम ने बताया कि 15 अगस्त को प्रस्तावित धरना पटवारी के एक माह में राशि खातों में पहुंचाने के आश्वासन पर स्थगित किया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब किसानों के पास परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
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