पटना, अप्रैल 17 -- ंपूर्ण भारत देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 01 अप्रैल से लागू थे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के प्रति सभी संबंधित हितधारकों में जागरूकता अभिवर्धित करने एवं उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम कई चरणों में चलाया जा रहा है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद मई माह में विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जायेगा। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रशिक्षण के द्वितीय चरण में राज्य के पटना एवं जहानाबाद जिलों के मुखिया सहित पंचायत स्तर तक के संबंधित पदाधिकारी तथा प्रखंड समन्वयक एवं अन्य के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में कुल 1335 प्रतिभागी जुड़े रहे।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. डीके. शुक्ला ने कहा कि इस नियमावली, 2026 को नियमावली, 2016 के स्थान पर अधिसूचित किया गया है, जो एक अप्रैल से लागू है। नियमावली 2026 बुनियादी कचरा संग्रहण से हटकर डेटा संचालित, सख्त कानूनी जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। इसका उद्देश्य कचरा को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित कर चक्रीय अर्थव्यवस्था को सुद्धढ़ करना है। नये नियमावली में ठोस अपशिष्ट का चार स्तरीय पृथक्करण स्रोत पर ही किया जाना अनिवार्य किया गया है। थोक कचरा उत्पादकों की जवाबदेही तय की गई है। थोक कचरा उत्पादक (बल्क वेस्ट जेनरेटर्स) को 100 प्रतिशत गीले कचरे का स्थल पर ही प्रसंस्कण (ऑनसाइट प्रोसेसिंग) करना होगा अन्यथा विस्तारित उत्पादक प्रमाणमन्त्र (एपीआर) प्राप्त करना होगा। थोक अपशिष्ट उत्पादकों को विभिन्न मानदंडों यथा पलोर एरिया (फ्लोर एरिया ≥ 20,000एम2) प्रतिदिन, कचड़ा उत्पादन ≥ 100 प्रतिदिन और जल की खपत 2 40,000 लीटर प्रतिदिन के आधार पर चिन्हित किया गया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित