इटावा , मार्च 28 -- उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में मानसिक रूप से अक्षम महिला से दुष्कर्म के मामले में जांच समिति की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। नौ सदस्यीय जांच समिति ने विभागाध्यक्ष (एचओडी) प्रो. ए.के. मिश्रा सहित वार्ड में तैनात 14 कर्मचारियों को लापरवाही का दोषी पाया है। साथ ही यूनिवर्सिटी में सफाई कार्य कर रही सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
विश्वविद्यालय के कुल सचिव दीपक कुमार ने शनिवार को बताया कि जांच रिपोर्ट को कार्यपरिषद की बैठक में प्रस्तुत करने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत की जा रही है।
प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. एस.पी. सिंह को जांच अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी राज कुमार सचवानी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभागीय जांच की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का भी निर्णय लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार जांच में वार्ड की निगरानी प्रणाली, ड्यूटी रोस्टर, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और संविदा कर्मचारियों की तैनाती में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी और जवाबदेही तय न होने के कारण यह गंभीर घटना लंबे समय तक सामने नहीं आ सकी।
गौरतलब है कि 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय मानसिक रूप से अक्षम महिला को मानसिक रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। 17 मार्च 2026 को नियमित जांच के दौरान उसके करीब पांच माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार वाल्मीकि निवासी लखना, थाना बकेवर को आरोपी बनाया गया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं और न्यायालय में पीड़िता के बयान भी दर्ज कराए गए हैं।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विभागाध्यक्ष को पद से हटाने के साथ ही संबंधित वार्ड के एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया था। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। अब जांच रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय होने के बाद मामला निर्णायक चरण में पहुंच गया है। विभागीय जांच शुरू होने के साथ ही दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
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