नेपीडा , अप्रैल 03 -- म्यांमार के सैन्य जुंटा प्रमुख जनरल मिन आंग हलिंग को शुक्रवार को सेना के समर्थन और संघीय संसद ने औपचारिक रूप से देश का राष्ट्रपति चुन लिया।

तीन नामांकित उम्मीदवारों में से श्री हलिंग ने सबसे अधिक वोट हासिल किये। उनके अलावा दो उप-राष्ट्रपतियों को भी चुना गया है। इनमें से एक हैं, पूर्व प्रधानमंत्री न्यो सॉ और दूसरे हैं, यूनियन सॉलीडेरिटी एडं डेवलवमेंट(यूएसडीपी) पार्टी की नेता नैन नी नी ऐ।

सैन्य शासन की प्रक्रिया पर पूर्ण पकड़ को देखते हुए इस नतीजे पर किसी को हैरानी नहीं हुई। फरवरी 2021में लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर सत्ता हथियाने वाले श्री हलिंग पर लंबे समय से युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

स्थानीय मीडिया इरावदी टाइम्स ने यह जानकारी प्रकाशित की है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने फरवरी 2021 में उस समय सत्ता पर कब्जा किया था, जब प्रतिष्ठित नेता आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने वाली थी। उन्होंने 2020 के चुनावों में धोखाधड़ी का झूठा दावा कर 'आपातकाल' के नाम पर तख्तापलट किया था।

तख्तापलट के बाद जुंटा ने 2020 के चुनावी नतीजों को रद्द कर दिया था और राष्ट्रपति यू विन म्यिंट और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की सहित हजारों लोकतंत्र समर्थकों को जेल में डाल दिया था।

अखबार के अनुसार कई जानकारों का मानना है कि हलिंग का शासन भविष्य में भी अपने प्रमुख सहयोगियों चीन, रूस और बेलारूस के समर्थन पर टिका रहेगा और जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आएगा, यह केवल उनके शासन को 'सभ्य' दिखाने की एक कोशिश है।

सेना के हस्तक्षेप के चलते म्यांमार की स्थिति बेहद चिंताजनक रही है। सैन्य तानाशाही के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह को कुचलने की कोशिशों में अब तक 30 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। कुप्रबंधन औरभारी मुद्रास्फीति के कारण देश में गरीबी दर बढ़कर 31 प्रतिशत हो गयी है। पिछले पांच वर्षों में हवाई हमलों, सामूहिक हत्याओं, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियों और आम नागरिकों पर अत्याचार के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने श्री हलिंग की कड़ी निंदा की है।

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