तेहरान , अप्रैल 14 -- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा है कि सैन्य कार्रवाई से अमेरिका की "खुद की पैदा की गई समस्याएं" और बढ़ जाएंगी, जबकि ईरान ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बावजूद शांति वार्ता जारी रखने की तत्परता दिखायी है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में श्री पेज़ेश्कियन ने कहा कि ईरान विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीति को ही पसंदीदा मार्ग मानता है और इसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि धमकियां, दबाव और सैन्य कार्रवाई किसी भी तरह से मददगार नहीं हैं, और यूरोप से आग्रह किया कि वह अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए दबाव डाले।
गौरतलब है कि श्री पेज़ेश्कियन ये टिप्पणियां चल रहे संघर्ष के 46वें दिन आई हैं। यह संघर्ष अब मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करके देश को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने के रूप में बदल गया है, ठीक उसी समय जब ईरान युद्ध से हुए नुकसान का आकलन करना शुरू कर रहा है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने कहा कि शुरुआती अनुमानों के मुताबिक नुकसान लगभग 270 अरब अमेरिकी डॉलर का है, हालांकि यह आंकड़ा अभी भी संशोधन के अधीन है। इस आकलन में बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान, औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से हुए आर्थिक नुकसान और बड़े पैमाने पर पैदा हुई बाधाओं को शामिल किया गया है। ईरान किसी भी भविष्य के समझौते के हिस्से के तौर पर हर्जाने को शामिल करने पर भी ज़ोर दे रहा है। यह मुद्दा अमेरिका के साथ हाल ही में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान उठाया गया था।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई बातचीत से न तो शांति स्थापित हो पाई है और न ही कोई समझौता हो सका है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि सारगर्भित चर्चाएं हुई हैं, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि कोई समझौता नहीं हो पाया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने संकेत दिया है कि संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, हालाँकि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि औपचारिक बातचीत कब फिर से शुरू हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का संघर्ष-विराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में और तेज़ी आ गई है।
इस बीच अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक नाकेबंदी के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ रहा है। शिपिंग डेटा से पता चलता है कि नाकेबंदी लागू होने के बाद ईरान से जुड़े कम से कम चार जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुज़रे हैं। चीन ने इस कदम की "खतरनाक और गैर-ज़िम्मेदाराना" बताते हुए निंदा की है, और चेतावनी दी है कि इससे तनाव और बढ़ सकता है तथा नाज़ुक संघर्ष-विराम कमज़ोर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत, अमीर सईद इरावानी ने इस नाकेबंदी को देश की संप्रभुता का "गंभीर उल्लंघन" बताया है।
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