बैतूल , अप्रैल 15 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के बीच किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले सत्यापन में पास हो चुके कई किसानों को अब सैटेलाइट वेरिफिकेशन में असत्यापित बताया जा रहा है, जिससे उनकी स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है।

जानकारी के अनुसार जिले में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू हुई है। शुरुआती चार दिनों में 224 किसानों से 7,493 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। हालांकि खरीदी प्रक्रिया के बीच शासन द्वारा गड़बड़ी की आशंका के चलते राजस्व विभाग से दोबारा सैटेलाइट वेरिफिकेशन कराया जा रहा है, जिससे समस्या खड़ी हो गई है।

किसानों का कहना है कि फसल कटाई के बाद सैटेलाइट इमेज में गेहूं दिखाई देना संभव नहीं होता, ऐसे में उन्हें असत्यापित कर दिया जा रहा है। जिन किसानों का पहले पंजीयन और सत्यापन हो चुका था, वे अब दोबारा जांच में फेल हो रहे हैं, जिसका सीधा असर स्लॉट बुकिंग पर पड़ रहा है।

घोड़ाडोंगरी ब्लॉक में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां किसानों ने गेहूं की बोवनी की थी, लेकिन सैटेलाइट जांच में उन्हें असत्यापित कर दिया गया। जब ये किसान खरीदी केंद्रों पर स्लॉट बुक करने पहुंचे, तो सिस्टम में उनका पंजीयन अमान्य दिखा।

जिले में वर्तमान स्थिति यह है कि एक हेक्टेयर से कम रकबे वाले छोटे किसानों के स्लॉट ही बुक हो पा रहे हैं, जबकि बड़े रकबे वाले किसान परेशान हैं। छोटे किसान 10 से 15 क्विंटल गेहूं लेकर खरीदी केंद्रों तक पहुंच रहे हैं और उनकी उपज खरीदी जा रही है, जबकि बड़े किसानों की उपज खरीदी अटक गई है। इसके अलावा जिले के 64 खरीदी केंद्रों में से अब तक केवल 34 केंद्रों पर ही खरीदी शुरू हो पाई है, जबकि 30 केंद्र अभी भी बंद हैं, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।

जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी केके टेकाम ने बताया कि शासन के निर्देश पर लगभग 13,112 किसानों का सैटेलाइट वेरिफिकेशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्लॉट बुकिंग में आ रही दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

इधर जुवाड़ी गांव के किसान अभिषेक मेहतो और कोयलारी के सागर मिश्रा जैसे किसान असमंजस में हैं। दोनों ने क्रमशः 25 और 10 एकड़ में गेहूं की बोवनी की थी और पंजीयन भी कराया था, लेकिन अब सैटेलाइट जांच में असत्यापित होने के कारण उनकी उपज की खरीदी अधर में लटक गई है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सैटेलाइट वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सुधार कर जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।

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