नयी दिल्ली , जुलाई 24 -- देश का सेवा निर्यात 2025-26 में बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुँच गया जिसमें दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं तथा व्यावसायिक सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

सेवा निर्यात में दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं का हिस्सा 49.03 प्रतिशत तथा व्यावसायिक सेवाओं का 29.5 प्रतिशत रहा।

उन्होंने कहा कि दूसरे देशों और बाजारों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौतों ( विभिन्न एफटीए) और व्यापार संवर्धन पहलों के माध्यम से भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने देश के सेवा निर्यात में लगातार बढोतरी का उल्लेख करते हुए रिजर्व बैंक के आंकड़े दिये।

इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में सेवा निर्यात , 254.5 अरब डॉलर, 2022-23 में 325.3 अरब डॉलर, 2023-24 में 341.1 अरब डॉलर, 2024-25 में 387.5 अरब डॉलर तथा 2025-26 में सेवा निर्यात 421.3 अरब डॉलर के बराबर रहा।

श्री प्रसाद ने बताया कि सरकार द्वारा सेवा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनायी गयी है जिसमें एक तो विशिष्ट बाजारों और क्षेत्रों के लिए लक्षित रणनीतियाँ अपनाकर सेवा निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है।

इसी तरह सेवा निर्यात में बाधा बनने वाली घरेलू क्षेत्रीय चुनौतियों की पहचान हितधारकों से परामर्श के माध्यम से की जाती है तथा संबंधित विभागों और मंत्रालयों के सहयोग से उनका समाधान किया जाता है।

इस रणनीति के तहत एफटीए के माध्यम से भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए विदेशी बाजारों में बेहतर अवसर और बाजार पहुँच सुनिश्चित की जाती है।

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