मुंबई , अप्रैल 06 -- पश्चिम एशिया संकट के बावजूद इस साल मार्च में सेवा क्षेत्र की तेजी बरकरार रही। एचएसबीसी द्वारा सोमवार को जारी भारत सेवा खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च में एक ओर जहां नये कारोबार और सेवा गतिविधियों के विस्तार की गति जनवरी 2025 के बाद के निचले स्तर पर दर्ज की गयी, वहीं दूसरी ओर विदेशों से मिले ऑर्डर में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी तेजी रही।मार्च में सेवा क्षेत्र का पीएमआई 57.5 दर्ज किया गया, जो फरवरी के 58.1 से कम है। लगातार दूसरे महीने गिरने के बावजूद यह मजबूत विस्तार दिखाता है।
सूचकांक का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में वृद्धि और इससे कम रहना गिरावट दिखाता है। वहीं, 50 स्थिरता दर्शाता है।
भारत में एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मार्च में मांग मजबूत बनी रही, जिसमें विदेशों से मिले नये ऑर्डरों में साल 2024 के मध्य के बाद की सबसे बड़ी तेजी का बड़ा योगदान रहा। भविष्य को लेकर सेवा प्रदाताओं की उम्मीद सकारात्मक है। लागत की मुद्रास्फीति में हालांकि साल 2022 के बाद सबसे तेज वृद्धि देखने को मिली है जो ईंधन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ कारोबारी गतिविधियों की बात करें तो इसमें 14 महीने की सबसे सुस्त वृद्धि हुई है। पश्चिम एशिया संकट का असर उत्पादन पर देखने को मिला है क्योंकि इससे मांग, बाजार की परिस्थिति और पर्यटन प्रभावित हुआ है।
चार बड़े वर्गों में नये ऑर्डरों में फरवरी की तुलना में धीमी वृद्धि देखी गयी। ये हैं, वित्त एवं बीमा वर्ग, रियल एस्टेट एवं कारोबारी सेवा वर्ग और परिवहन, सूचना एवं संचार वर्ग। इसके बावजूद सभी चार वर्गों में विदेशों से मिले ऑर्डरों की रफ्तार बढ़ी है।
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