बिलासपुर , अप्रैल 04 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में देरी को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए शनिवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायालय ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसके भविष्य निधि (पीएफ) की देरी से हुई भुगतान राशि पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए।
दरअसल, याचिकाकर्ता जगन्नाथ सिंह वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त हुए थे लेकिन उनके पीएफ की कुल राशि में से करीब 1.55 लाख रुपए 12 साल बाद यानी 24 जनवरी 2023 को जारी किए गए। यह देरी विभागीय पासबुक में एंट्री नहीं होने के कारण हुई, जिसे न्यायालय ने साफ तौर पर प्रशासनिक चूक माना।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ कर्मचारी का अधिकार हैं, न कि कोई उपहार। यदि भुगतान में देरी होती है तो कर्मचारी को ब्याज मिलना ही चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अक्टूबर 2011 से 24 जनवरी 2023 तक की अवधि के लिए 1.55 लाख रुपए पर आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। साथ ही यह भुगतान आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश गया है कि सेवानिवृत्ति लाभों में देरी पर जिम्मेदार विभागों को आर्थिक जवाबदेही तय करनी होगी।
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