दुर्ग , अगस्त 16 -- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए ऑनलाइन विज्ञापन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
भिलाई नगर थाना पुलिस से आज मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान विशाल नागले (24) के रूप में हुई है। वह नौवीं कक्षा तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। पुलिस अब इस साइबर ठगी के मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस के मुताबिक भिलाई के हुडको निवासी जयंत बागची (61) भिलाई इस्पात संयंत्र से सेवानिवृत्त हैं और इससे पहले भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 10 मार्च 2026 को फेसबुक चलाने के दौरान उन्हें ऑनलाइन निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सचिन तेंदुलकर और सुधा मूर्ति जैसे चर्चित नामों का इस्तेमाल होने के कारण उन्होंने इसे विश्वसनीय मानकर उसमें दिए लिंक पर क्लिक किया और रजिस्ट्रेशन कर दिया।
रजिस्ट्रेशन के बाद कृतिका नाम की महिला ने उनसे संपर्क किया और स्वयं को निवेश प्रक्रिया से जुड़ा बताया। उसने बागची के वरिष्ठ नागरिक होने का हवाला देते हुए रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 18,998 रुपए जमा करने को कहा। पीड़ित ने यह रकम ऑनलाइन जमा कर दी। इसके बाद अलग-अलग व्यक्तियों ने उनसे संपर्क कर निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लगातार राशि जमा करानी शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार इसके बाद सिद्धार्थ विपुल नाम के व्यक्ति ने स्वयं को अकाउंट मैनेजर बताते हुए बागची से संपर्क किया और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश कराने की बात कही। आरोपियों ने विश्वास हासिल करने के लिए दावा किया कि उनका कारोबार ब्रिटेन , अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत चार देशों में संचालित होता है।
इसके बाद बागची ने 17 मार्च को एक लाख रुपए तथा 24 और 25 मार्च को पांच-पांच लाख रुपए जमा किए। आरोपियों ने उनसे ट्रेडिंग में मार्जिन बढ़ाने के नाम पर भी अतिरिक्त रकम की मांग की।
पुलिस ने बताया कि 26 मार्च को करण तनेजा नाम के व्यक्ति से पीड़ित की बातचीत कराई गई। उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए सोने के भाव में तेजी आने की बात कही और सोने में निवेश को लाभदायक बताया। इस पर बागची ने 27 मार्च को 25 लाख रुपए जमा कर दिए।
इसके बाद आरोपियों ने ऑयल ट्रेडिंग में मुनाफे का प्रलोभन दिया। पीड़ित ने नौ अप्रैल को पांच लाख रुपए और 16 अप्रैल को चार लाख रुपए जमा किए। इस तरह रजिस्ट्रेशन, ट्रेडिंग, मार्जिन तथा सोने और ऑयल में निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 45 लाख 18 हजार 998 रुपए जमा करा लिए गए।
ठगी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। जब बागची ने निवेश की रकम वापस मांगी तो उन्हें बताया गया कि पहले ट्रेडिंग अकाउंट बंद करना होगा। इसके बाद उनके ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर का लाभ और मूल रकम मिलाकर राशि दिखाई गई। पीड़ित ने करीब 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी दी। आरोपियों ने इसे क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन बताते हुए राशि बैंक खाते में पहुंचने में दो से तीन दिन लगने की बात कही।
पुलिस के अनुसार 20 अप्रैल को पीड़ित ने भुगतान की स्थिति पूछी तो आरोपियों ने 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स के रूप में 34 लाख रुपए से अधिक जमा करने की मांग कर दी। बागची ने टैक्स की राशि भुगतान में से काटकर शेष रकम देने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने अपनी मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी और दावा किया कि यह रकम जमा करने पर आंशिक भुगतान कर दिया जाएगा। इसी दौरान समीर नाम के व्यक्ति ने भी उनसे संपर्क कर टैक्स जमा करना आवश्यक बताया।
आरोपियों ने 22 अप्रैल को बागची से कहा कि उनकी रकम भुगतान के लिए तैयार है और टैक्स जमा होते ही उसे जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें अरुणाचल प्रदेश स्थित एक बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से राशि भेजने को कहा गया। दूसरे राज्य के बैंक खाते में टैक्स की रकम भेजने की बात सामने आने पर बागची को संदेह हुआ और उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और अपने बैंक को भी इसकी सूचना दी।
शिकायत पर भिलाई नगर थाने में अपराध क्रमांक 217/2026 दर्ज कर धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला कायम किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल अलग-अलग बैंक खातों के लेन-देन, डिजिटल जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। बैंकिंग ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस मध्यप्रदेश के बैतूल तक पहुंची और वहां से विशाल नागले (24) को गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक विशाल नौवीं फेल है और मजदूरी करता है। वह वर्ष 2020 में मजदूरी करने पुणे गया था, जहां लॉट में ऑनलाइन अकाउंट खुलवाया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि उसके इसी अकाउंट में ठगी की रकम आई थी। हालांकि खाते के इस्तेमाल और पूरे नेटवर्क में आरोपी की भूमिका सहित अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है।
पुलिस ने विशाल के कब्जे से एक बैंक की चेकबुक, आधार कार्ड और ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन जब्त किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बागची से ठगे गए 45 लाख 18 हजार 998 रुपए किन-किन बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए, राशि का अंतिम लाभार्थी कौन है और इस साइबर ठगी गिरोह में कितने लोग शामिल हैं। मामले के मास्टरमाइंड सहित अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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