नयी दिल्ली , फरवरी 25 -- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की पश्चिमी सीमा से लगते क्षेत्रों की 3400 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी करने के बाद यहां पहुंचे सशस्त्र बलों के 'भारत रणभूमि दर्शन अभियान' दल का बुधवार को यहां राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर स्वागत किया। अभियान के दौरान इस दल ने गुजरात और राजस्थान के मुख्य सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हुए ऐतिहासिक युद्धस्थलों का अवलोकन किया और प्रमुख युद्ध स्मारकों पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने इस दल को 3 फरवरी को गुजरात के द्वारका से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था और इसमें सेना की तोपखाना रेजिमेंट , नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं।
अभियान के दौरान इस दल ने सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों और पूर्व सैनिकों से संवाद किया तथा भारत के वीर जवानों के शौर्य और बलिदान को नमन किया।
'भारत रणभूमि दर्शन' के अंतर्गत 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 77 ऐतिहासिक युद्ध स्थलों की पहचान की गई है। यह रक्षा मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को प्रदर्शित करने वाले स्थलों से जोड़ना है।
पिछले वर्ष सेना दिवस के अवसर पर शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य प्रमुख युद्धस्थलों और संचालन क्षेत्रों को राष्ट्रीय स्मृति स्थलों में परिवर्तित करना है, साथ ही दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में जिम्मेदार पर्यटन को प्रोत्साहित करना भी है।
चिह्नित 'शौर्य गंतव्य' स्थल भारत की कुछ सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमाओं पर स्थित हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 16 स्थान जिनमें गलवान घाटी, रेजांग ला और टाइगर हिल भी शामिल हैं जो 1962 के युद्ध, 1999 के कारगिल संघर्ष और 2020 की गलवान झड़प की याद दिलाते हैं।
राजस्थान में सात स्थल जैसे लोंगेवाला और तनोट, 1971 के युद्ध से जुड़े हैं। सिक्किम में नाथू ला और डोकलाम जैसे स्थान भारत-चीन सीमा पर हुए पूर्व टकरावों और गतिरोधों को रेखांकित करते हैं। अरुणाचल प्रदेश में 21 स्थल, जिनमें तवांग और बुम ला शामिल हैं 1962 के संघर्ष में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रमुखता से शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे अन्य राज्य भी इस पहल का हिस्सा हैं, जहां सर क्रीक क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
सरकार के अनुसार, यह कार्यक्रम केवल स्मारकों तक ही सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त करना और दूरदराज क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी है। सरकारी योजनाओं के तहत बेहतर सड़कें, बेहतर संपर्क और आगंतुक सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं, जिनका लाभ नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए होगा।
स्थानीय समुदायों को होमस्टे, मार्गदर्शक सेवाओं और छोटे उद्यमों के माध्यम से बढ़ते पर्यटन से लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पहल को 'भारत रणभूमि दर्शन' मोबाइल एप्लिकेशन का समर्थन मिला है, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले वर्ष सेना दिवस पर शुरू किया था। यह ऐप 1962, 1965, 1971 और कारगिल सहित प्रमुख युद्धों के ऐतिहासिक विवरण, वर्चुअल टूर, जीपीएस आधारित स्थल जानकारी तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में यात्रा और अनुमति संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
बहुभाषी विकल्प और आकर्षक विशेषताएँ इसे दर्शकों के लिए सुलभ बनाने का प्रयास करती हैं।
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