नई दिल्ली , अक्टूबर 12 -- सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को दिल्ली छावनी के मानेकशॉ सेंटर से 'स्टैलियंस पैन-हिमालयन ईवी राइडर्स अभियान' (स्फीयर) को रवाना किया।
सेना ने बताया कि करीब 4850 किलोमीटर लंबे इस अभियान में इलेक्ट्रिक वाहन हिमालय, गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर से गुजरेंगे। इसका उद्देश्य कठिन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता परखने के साथ पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना और देश की सीमाओं की रक्षा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देना है।
सेना सेवा कोर के 266वें स्थापना दिवस के तहत आयोजित यह अभियान उत्तराखंड के माणा गांव से होते हुए उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों और हिमालयी क्षेत्र में आगे बढ़ेगा। इसके मार्ग में 4500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले नाथू ला और बुम ला दर्रे भी शामिल हैं। अभियान का समापन 16 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित वालोंग युद्ध स्मारक पर होगा। यह दिन वालोंग दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
अभियान के दौरान कठिन रास्तों, खराब मौसम और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में इलेक्ट्रिक वाहनों की क्षमता, भरोसेमंद प्रदर्शन और लंबे समय तक चलने की योग्यता परखी जाएगी। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने और वहां की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय समुदायों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
यह अभियान अल्ट्रावायोलेट ऑटोमोटिव, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा के सहयोग से चलाया जा रहा है। इस पहल के जरिये सेना नई तकनीकों और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन समाधानों को बढ़ावा देना चाहती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सप्तधारा दृष्टिकोण के छठे स्तंभ के अनुरूप है, जो नई तकनीकों के जरिये हरित परिवहन को प्रोत्साहित करता है।
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