पटना , मई 26 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने राज्य सरकार की ओर घोषित सेटेलाइट टाउनशिप निर्माण योजना का विरोध करते हुए इसे "कॉरपोरेट पक्षधर और जनविरोधी" करार दिया है। भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने आरोप लगाया कि बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार का "रिमोट नियंत्रण दिल्ली से संचालित" हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी विस्तार के नाम पर सरकार ने बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।

श्री पाण्डेय ने कहा कि सरकार द्वारा सेटेलाइट एरिया में भूमि की खरीद-बिक्री पर अगले वर्ष तक लगाई गई रोक किसानों और भूमिधारकों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है और उन्हें अपनी जमीन बेचने से वंचित किया जा रहा है।

श्री पाण्डेय ने इस नीति को नवउदारवादी और पूंजीपरस्त दृष्टिकोण का हिस्सा बताते हुए कहा कि इसमें भूमि अधिग्रहण और बाजार नियंत्रण के जरिए कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस योजना में न तो उचित मुआवजे की गारंटी है और न ही पुनर्वास की स्पष्ट योजना।

भाकपा के राज्य सचिव ने कहा है कि पार्टी की राज्य परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सेटेलाइट टाउनशिप के नाम पर किसानों की जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।उन्होंने कहा कि किसी भी भूमि अधिग्रहण से पूर्व ग्रामसभा की सहमति, पारदर्शी मूल्य निर्धारण तथा पुनर्वास और पुनर्स्थापन की गारंटी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही कॉरपोरेट घरानों को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और सार्वजनिक भूमि का उपयोग केवल सार्वजनिक हित में करने की मांग की गई है। शहरी विस्तार की नीति में किसानों, भूमिहीनों और शहरी गरीबों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राज्य परिषद ने सभी जिला एवं अंचल कमेटियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सभाएं आयोजित कर किसानों को स्थिति की जानकारी दें। इसके साथ ही "भूमि बचाओ, किसान बचाओ" अभियान चलाने, जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने तथा चरणबद्ध आंदोलन तेज करने का आह्वान किया गया है।

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