चेन्नई , नवंबर 01 -- अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री केए सेगोट्टैयन ने शनिवार को पार्टी महासचिव ई.के. पलानीस्वामी पर तीखा हमला बोला और कोडानाड एस्टेट में कुख्यात डकैती एवं हत्या मामले में उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।
कोडानाड एस्टेट में पार्टी की दिवंगत नेता जे जयललिता राजनीतिक प्रवास पर आया करती थीं।
श्री सेगोट्टैयन ने अपने गृहनगर और निर्वाचन क्षेत्र गोबीचेट्टीपलयम में एक संवाददाता सम्मेलन में ईपीएस पर निशाना साधते हुए उस समय राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि ईपीएस कोडनाड हत्या मामले में "ए1" यानि प्रमुख आरोपी हैं।
यह 2017 की एक हाई-प्रोफाइल आपराधिक जांच थी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के नीलगिरी एस्टेट में तोड़फोड़ और हत्या की घटना हुई थी। श्री सेगोट्टैयन ने इस बात पर बल दिया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ईपीएस को इस मामले से निपटने के तरीके के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
हमले को और तेज करते हुए उन्होंने व्यंग्यात्मक तरीके से कहा कि अन्नाद्रमुक को कमजोर करने और भाजपा गठबंधन से अलग होने में उनकी भूमिका के लिए ईपीएस को "विश्वासघात का नोबेल पुरस्कार" प्रदान करना चाहिए। इसी वजह से उस समय उनकी सरकार बची थी।
उन्होंने कहा कि ईपीएस महान एमजीआर द्वारा प्रस्तुत मूल पार्टी सिद्धांतों से भटक गए हैं और उन्होंने पार्टी के दीर्घकालिक नियमों में भी बदलाव किया है तथा वरिष्ठ नेताओं को अन्यायपूर्ण तरीके से दरकिनार कर दिया है।
उन्होंने अपने निष्कासन पर गहरा दुख व्यक्त किया और ईपीएस पर विश्वासघात को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, विशेष रूप से एंथियूर निर्वाचन क्षेत्र में ईपीएस के प्रबंधन पर, जहां अन्नाद्रमुक महासचिव ने कहा था कि पार्टी 2021 के चुनावों में श्री सेगोट्टैयन के विश्वासघात और संबंधित विवादों के कारण हार गई थी।
श्री सेगोट्टैयन ने एमजीआर की निरंतर सफलता एवं निष्ठा पर प्रकाश डालते हुए ईपीएस की तुलना एमजीआर से की और कहा कि ईपीएस ने कभी भी सही मायने में जीत हासिल नहीं की या पार्टी की उम्मीदों को पूरा नहीं किया।
श्री सेगोट्टैयन के सार्वजनिक आक्रोश में यह दावा भी शामिल था कि ईपीएस ने अस्थायी महासचिव के रूप में पार्टी और गठबंधन के साथ विश्वासघात किया जिनसे सत्ता पर उनकी पकड़ बनी रहे। उन्होंने पार्टी संरचना के अंतर्गत काम करना जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की लेकिन कोडनाड मामले और पार्टी के आंतरिक विश्वासघात में ईपीएस को स्पष्ट रूप से "ए1" कहा।
पार्टी में अंदरूनी कलह तब और बढ़ गयी जब ईपीएस ने श्री सेंगोट्टैयन की मुखर आलोचना के बाद उन्हें पार्टी के प्रमुख पदों से हटा दिया। इसके बावजूद श्री सेंगोट्टैयन ने कार्यकर्ताओं की इच्छा का हवाला देते हुए और एमजीआर और जयललिता दोनों की विरासत का हवाला देते हुए पार्टी में एकता कायम रखने की अपील की और 2026 के चुनावों में अन्नाद्रमुक के पुनरुत्थान के लिए एकजुट दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
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