मंडी गोबिंदगढ़ , अक्तूबर 19 -- पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त (राजस्व) केबीएस सिद्धू ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री और जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कबाड़ आधारित सेकेंडरी स्टील उद्योग की जीएसटी व्यवस्था सरल बनाने की मांग की है।

उन्होंने परिषद से इस क्षेत्र को अलग विषय के रूप में लेकर इसकी कर संबंधी समस्याओं की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

मंडी गोबिंदगढ़ और खन्ना के उद्योग प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद लिखे गए पत्र में सिद्धू ने कहा कि प्रधानमंत्री के कारोबार सुगमता पर जोर और वित्त मंत्रालय की कराधान में विश्वास आधारित व्यवस्था की दिशा में पहल को देखते हुए इस क्षेत्र के लिए ऐसी कर प्रणाली तैयार की जानी चाहिए, जिससे कर चोरी की गुंजाइश कम हो।

उन्होंने बताया कि मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और लुधियाना में चलने वाली इंडक्शन भट्टियों और री-रोलिंग मिलों की कार्यप्रणाली लौह अयस्क और कोकिंग कोयले पर आधारित एकीकृत स्टील संयंत्रों से अलग है। सेकेंडरी स्टील इकाइयां ऐसा कबाड़ खरीदती हैं, जो घर-घर से कबाड़ एकत्र करने वालों, कबाड़ियों, व्यापारियों और कभी-कभी वित्तपोषकों के कई स्तरों से गुजरता है।

सिद्धू के अनुसार आपूर्ति शृंखला की प्रत्येक कड़ी पर फर्जी फर्मों के जरिए फर्जी बिल जारी होने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों में आपूर्तिकर्ता के चूक करने पर कर वसूली का बोझ अक्सर अंतिम स्तर पर मौजूद निर्माता पर पड़ता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि इस क्षेत्र में फर्जी बिलिंग एक गंभीर समस्या है और उनका उद्देश्य दोषियों के प्रति नरमी बरतने की मांग करना नहीं है। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात की जांच करने की है कि मौजूदा कर व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियों को बढ़ावा देने वाले कारण क्या हैं और इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।

पत्र में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक अक्तूबर 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें स्टील और कबाड़ उद्योग से संबंधित अधिकांश मामलों सहित 424 याचिकाओं पर निर्णय दिया गया था। सिद्धू के अनुसार, फैसले के पैरा 104 में सरकार और जीएसटी परिषद को आपूर्तिकर्ता का पंजीकरण रद्द किए जाने पर जीएसटी पोर्टल के माध्यम से खरीदारों को सचेत करने, आपूर्तिकर्ता द्वारा कर भुगतान की वास्तविक समय में पुष्टि, कर चूक संबंधी सूचना, पंजीकरण के समय कड़ी जांच और असंगठित क्षेत्र से खरीदे गए कबाड़ पर रिवर्स चार्ज व्यवस्था जैसे उपायों पर विचार करने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने उद्योग में चर्चा के दौरान सामने आए कुछ विकल्प भी पत्र में रखे हैं। इनमें कबाड़ की पूरी आपूर्ति शृंखला पर रिवर्स चार्ज व्यवस्था लागू करना, कबाड़ और सेकेंडरी स्टील पर कर की दर घटाना, इनपुट टैक्स क्रेडिट के इस्तेमाल को आपूर्ति शृंखला के सीमित चरणों तक रखना तथा तकनीक आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू करना शामिल है।

हालांकि, उन्होंने इनमें से किसी एक विकल्प की सिफारिश नहीं की और कहा कि प्रत्येक विकल्प के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव सहित उसकी लागत का आकलन जीएसटी परिषद ही कर सकती है।

सिद्धू ने परिषद से आग्रह किया है कि इस क्षेत्र की समस्याओं का विशेष रूप से अध्ययन करने के लिए मंत्रियों का समूह गठित किया जाए अथवा फिटमेंट समिति या अधिकारियों की समिति को जिम्मेदारी सौंपी जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रक्रिया में संबंधित राज्यों और उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए तथा समिति की रिपोर्ट परिषद की दरों से संबंधित वार्षिक बैठक में रखी जाए।

उन्होंने कहा कि पंजाब में हजारों लोगों को रोजगार देने और कबाड़ का पुनर्चक्रण करने वाले इस उद्योग के लिए ऐसी कर व्यवस्था जरूरी है, जिसमें ईमानदार निर्माता को किसी बेईमान बिचौलिए की कर चूक का जोखिम न उठाना पड़े और धोखाधड़ी करने वालों के लिए कोई लाभ न बचे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित