जिनेवा , जून 23 -- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में अप्रैल 2023 में शुरू हुए सूडान संघर्ष के दौरान व्यापक और व्यवस्थित यौन हिंसा का दस्तावेजीकरण किया गया है जिसमें चेतावनी दी गयी है कि इन घटनाओं के पीड़ितों और प्रभावित समुदायों पर गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यौन हिंसा संघर्ष और विस्थापन के फैलाव के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में फैली तथा इसका इस्तेमाल नागरिकों को आतंकित करने, दंडित करने और नियंत्रित करने के हथियार के रूप में किया गया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा, "जैसा कि मैंने जनवरी में सूडान यात्रा के अंत में चेतावनी दी थी, यौन हिंसा का इस्तेमाल युद्ध के हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह युद्ध अपराध है और यदि इसे व्यापक या व्यवस्थित हमले के हिस्से के रूप में अंजाम दिया गया है तो यह मानवता के खिलाफ अपराध भी है।"संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि युद्ध शुरू होने से लेकर इस वर्ष अप्रैल के मध्य तक सूडान के 18 में से 16 राज्यों में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा की 546 घटनाओं की पुष्टि की गयी है। इन घटनाओं में कम से कम 838 लोग प्रभावित हुए, जिनमें महिलाएं, लड़कियां, पुरुष और लड़के शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार कम रिपोर्टिंग के कारण वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश मामलों के लिए रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के वर्दीधारी सदस्य, उससे जुड़े समूह और अरब मिलिशिया जिम्मेदार पाये गये। कुछ घटनाएं सूडानी सशस्त्र बलों, उनसे जुड़े सुरक्षा समूहों और अन्य सशस्त्र संगठनों से भी जुड़ी मिलीं।
रिपोर्ट में दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, यौन दासता, जबरन विवाह, जबरन वेश्यावृत्ति, यौन यातना तथा यौन शोषण के उद्देश्य से मानव तस्करी जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। दर्ज मामलों में लगभग एक-चौथाई घटनाएं सामूहिक दुष्कर्म की थीं। कम से कम 85 महिलाओं और लड़कियों को यौन दासता में रखा गया तथा उनसे घरेलू कामकाज और आय अर्जित करने वाले कार्य जबरन कराये गये।
रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 13 पीड़ितों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश की मृत्यु सामूहिक दुष्कर्म के बाद हुई। इसके अलावा 59 महिलाएं और लड़कियां दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुईं या उन्होंने बच्चों को जन्म दिया। दर्ज मामलों में सबसे कम उम्र की पीड़िता नौ वर्ष की थी।
रिपोर्ट में विशेष रूप से पश्चिमी दारफुर में मसालित समुदाय के खिलाफ जातीय आधार पर की गई हिंसा का भी उल्लेख किया गया है। कई पीड़ितों ने बताया कि हमलावरों ने हमलों के दौरान उनकी जातीय पहचान का जिक्र किया। रिपोर्ट में हमलावरों के हवाले से कहा गया है, "तुम मसालित हो, आज हम तुम्हें मार डालेंगे।"तुर्क ने स्वतंत्र जांच और कमांड स्तर तक जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि लगातार दंड से बच निकलने की प्रवृत्ति मानवाधिकार उल्लंघनों के चक्र को और गहरा कर रही है।
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