नागपुर , मार्च 14 -- महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र में 675 तेंदुओं की मृत्यु हुई है।

राज्य वन विभाग ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत ये जानकारी दी है। ये आंकड़े जनवरी 2021 से फरवरी 2026 की शुरुआत तक की अवधि के हैं।

इनमें से करीब 40 प्रतिशत मौतें दुर्घटनाओं के कारण हुईं। इनमें 99 तेंदुए सड़क हादसों में मारे गए, जबकि 91 तेंदुओं की मौत खुले कुओं या पानी की टंकियों में गिरने से हुई।

मौतों का सबसे बड़ा हिस्सा, यानी 320 मामले (47 प्रतिशत), प्राकृतिक कारणों से जुड़े हैं। वहीं दूसरी ओर, बिजली का करंट लगने और जाल में फंसने जैसी घटनाओं सहित अवैध शिकार के कारण 30 तेंदुओं की जान गई।

तेंदुओं की मौत की सबसे ज्यादा संख्या नासिक और पुणे वन क्षेत्रों में दर्ज की गई, जो इन क्षेत्रों में तेजी से होते शहरी विस्तार और बढ़ती कृषि गतिविधियों के बीच इस प्रजाति के लिए बढ़ती चुनौतियों की ओर इशारा करती है।

वर्ष-वार आंकड़े बताते हैं कि 2021 में सबसे अधिक 167 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह संख्या सबसे कम 77 रही।

इसके अतिरिक्त, 45 तेंदुओं की मौत को अज्ञात कारणों की श्रेणी में रखा गया है, जबकि 31 मामलों की अभी भी जांच चल रही है। इससे वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच उन अपराधों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जो शायद सामने नहीं आ पाए हैं।

वन्यजीव संरक्षण समर्थकों ने तत्काल एहतियाती उपायों की मांग की है, जिसमें खुले कुओं को ढकना, पानी की टंकियों में बाहर निकलने के रास्ते बनाना और राजमार्गों पर वन्यजीवों के पार जाने के लिए सुरक्षित मार्ग बनाना शामिल है, विशेष रूप से नासिक, पुणे और मुंबई जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में।

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