पटना , जुलाई 16 -- बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को अधिक सुगम, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से संचालित सुलभ संपर्कता योजना के तहत राज्यभर में 65 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं पर कार्य तेजी से किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि प्रमुख संस्थानों तक कम दूरी और कम समय में ग्रामीणों की पहुँच सुनिश्चित करना अब ग्रामीण कार्य विभाग की प्राथमिकता बन गया है। इसी सोच के साथ विभाग की ओर से संचालित सुलभ संपर्कता योजना के अंतर्गत ऐसे वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे गांवों का सीधा जुड़ाव अस्पतालों, बाजारों, प्रखंड एवं अनुमंडल मुख्यालयों, जिला मुख्यालयों तथा राष्ट्रीय एवं राजकीय राजमार्गों से सुनिश्चित हो सके।

इस योजना के प्रथम चरण में 65 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का चयन किया गया है, जिनके माध्यम से 181 किलोमीटर लंबे नए संपर्क मार्गों एवं वैकल्पिक सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना है।

सुलभ संपर्कता योजना के तहत चयनित परियोजनाओं पर राज्य के विभिन्न जिलों में निर्माण कार्य तेजी से कार्य किया जा रहा है, जबकि कुछ परियोजनाएँ निविदा प्रक्रिया के अंतिम चरण में हैं। इस योजना के अंतर्गत उन मार्गों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ वर्तमान सड़क संपर्क लंबा, जटिल अथवा अनुपयुक्त होने के कारण लोगों को आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने में अतिरिक्त समय और दूरी तय करनी पड़ती थी। इस योजना के तहत राजधानी पटना के बाढ़, दानापुर और मसौढ़ी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की राष्ट्रीय राजमार्गों से सीधी संपर्कता सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त जहानाबाद, लखीसराय, बांका, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गया, औरंगाबाद, नालंदा, भोजपुर, अरवल, रोहतास और कटिहार सहित अनेक जिलों में भी राष्ट्रीय एवं राजकीय राजमार्गों से ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर है।

सुलभ संपर्कता योजना का मूल उद्देश्य केवल नई सड़कें बनाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के आवागमन के स्वरूप को अधिक व्यवहारिक, सुगम और प्रभावी बनाना है। यही कारण है कि ऐसे वैकल्पिक अथवा सीधे संपर्क मार्ग तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे ग्रामीणों को अस्पताल, शिक्षण संस्थान, कृषि बाजार, बैंक, सरकारी कार्यालय, प्रखंड, अनुमंडल और जिला मुख्यालय तक पहुँचने के लिए अनावश्यक लंबी दूरी तय न करनी पड़े। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग, राजकीय राजमार्ग तथा वृहद जिला पथों से गांवों का सीधा जुड़ाव सुनिश्चित कर परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्थानों पर पुराने संकरे मार्गों के विकल्प के रूप में नए बाईपास एवं थ्रू-रूट तैयार किए जा रहे हैं, जिससे यातायात अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो सके।

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