पटना, मार्च 21 -- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने शनिवार को कहा कि स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
श्री पांडे ने आज बयान जारी कर कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस( यौन संक्रमण से फैलने वाले रोग) एवं हेपाटाईटिस के संक्रमण की पहचान पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। इसके लिये मिशन मोड में राज्य के अंदर सभी गर्भवती महिलाओं के प्रथम तिमाही में ही एचआईवी, सिफलिस एवं हेपाटाईटिस की जांच शुरू कर दी गयी है। यह जांच महीने की 09, 15 और 21 तारीख को आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में एचआईवी एवं सिफलिस के प्रसार को रोकना और नियंत्रित करके मातृ और शिशु स्वास्थ्य परिणाम में सुधार करना है।
मंत्री ने कहा कि राज्य में सतत विकास लक्ष्य की पूर्ति के लिए मिशन एड्स सुरक्षा अभियान प्रारंभ किया गया है,जिसके तहत एचआईवी,सिफलिस और हेपेटाइटिस के लिए दिसंबर 2026 तक लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
श्री पांडे ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य और जिला स्तर पर मिशन मोड दृष्टिकोण एवं समेकित प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिलों को स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। सभी लेबर रूम, डिलीवरी प्वाइंट, आरोग्य सत्र दिवसों की साइट पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए ड्यूल एचआईवी, सिफलिस एवं हेपेटाइटिस किट के माध्यम से जांच सुनिश्चित की जा रही है। सभी संस्थानों में आवश्यकतानुसार एचआईवी, सिफलिस एवं हेपेटाइटिस किट सुनिश्चित किया गया है।
श्री पांडे ने कहा कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए एआरटी उपचार की ससमय शुरूआत की जाएगी और सिफलिस से संक्रमित माताओं के लिए उपचार एवं फॉलोअप मार्गदर्शिका के अनुसार की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी एक्सपोज्ड शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद नजदीकी एसएनसीयू में भर्ती किया जाएगा ताकि आवश्यक मूल्यांकन करते हुए उपचार मार्गदर्शिका के अनुसार संभव हो सके। उन्होंने कहा कि सभी एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की 32 - 36 सप्ताह की गर्भावस्था में वायरल लोड जांच अनिवार्य की गयी है। सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में किए गए एचआईवी और सिफलिस स्क्रीनिंग में रिएक्टिव पाए जाने वाले व्यक्तियों को नजदीकी एसटीडी केंद्रों से समन्वय स्थापित करते हुए एचआईवी और सिफलिस से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मंत्री ने कहा कि सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में कार्यरत सेवा प्रदाताओं चिकित्सकों ,आशा,नर्सिंग कर्मियों तथा अन्य लोगों का नियमित अंतराल पर क्षमतावर्धन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हॉटस्पॉट,सुदूर क्षेत्रों,उच्च एचआईवी प्रसार वाले क्षेत्रों में एचआईवी संक्रमितों की पहचान के लिए आवश्यकतानुसार समेकित स्वास्थ्य शिविर का आयोजन नियमित अंतराल पर सुनिश्चित की जाएगी।
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