गांधीनगर , अप्रैल 14 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुरक्षा परिदृश्य की बढ़ती जटिलताओं और डिजिटल अपराध जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए देश में तकनीकी रूप से सक्षम पुलिस बल की जरूरत पर बल दिया है।
श्रीमती मुर्मु मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले समय में, सुरक्षा परिदृश्य और भी अधिक जटिल होगा। उन्होंने कहा, ' कुछ ही साल पहले तक, हम 'डिजिटल अरेस्ट', 'साइबर अपराध' और 'फिशिंग हमलों' जैसे शब्दों से अपरिचित थे। फिर भी आज, ये हमारे सामने बड़े खतरों के रूप में खड़े हैं।" उन्होंने ऐसे परिदृश्य में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के महत्त्व और बढ़ते दायित्व को रेखांकित किया।
श्रीमती मुर्मु ने कहा ," राष्ट्र को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है जो तकनीकी रूप से सक्षम हों और साइबर धोखाधड़ी करने वालों को पकड़ने तथा उन्हें सजा दिलाने में निपुण हों; ऐसे फोरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है जो ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें जो अदालतों की जांच-परख में खरे उतरें; ।इसके साथ ही ऐसे सक्षम पेशेवरों की भी आवश्यकता है जो भू-राजनीति की बारीकियों को समझ सकें और वैश्विक मंच पर भारत के दृष्टिकोण को आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत कर सकें।"राष्ट्रपति ने कहा कि रणनीतिक अध्ययन अब केवल युद्ध और शांति के सिद्धांतों तक ही सीमित नहीं रह गए हैं। अब इनमें रक्षा निर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियां, आपूर्ति श्रृंखलाएं और आत्मनिर्भर औद्योगिक क्षमताएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा से संबंधित उद्योगों के साथ एक संवाद-समन्वय स्थापित करना इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल, केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) बिमल एन पटेल उपस्थित थे।
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