जयपुर , अप्रैल 24 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा कि जब विधानसभा, उच्च न्यायालय और कलेक्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील स्थानों एवं मुख्यमंत्री जैसे प्रमुख व्यक्ति को अपराधी सरेआम चुनौती दे रहे हैं तथा मुख्य अपराधी पुलिस की पहुंच से दूर हैं तो यह स्थिति दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां और सरकार इस नेटवर्क को तोड़ने में सफल नहीं हो पा रही हैं।
श्री गहलोत ने विधानसभा को फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही। उन्होंने अपने बयान में कहा कि राजस्थान की कानून व्यवस्था और सुरक्षा का जिस तरह से मज़ाक बन रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। राजस्थान विधानसभा को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलना कोई सामान्य बात नहीं है। अभी कुछ ही दिन पहले भी ऐसी धमकी मिली थी। बार-बार विधानसभा जैसे लोकतंत्र के मंदिर को निशाना बनाया जाना यह बताता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं और उनके मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
उन्होंने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री को कई बार धमकी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री केवल एक पार्टी के नहीं हम सभी के हैं। उन्हें इस तरह धमकी मिलना सभी के लिए चिंता का विषय है। उच्च न्यायालय, जिला कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों को मिल रही ये धमकियां जनता के मन में असुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।
जब विधानसभा, उच्च न्यायालय और कलेक्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील स्थानों एवं मुख्यमंत्री जैसे प्रमुख व्यक्ति को अपराधी सरेआम चुनौती दे रहे हों, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा, यह समझा जा सकता है। करीब छह महीने से इस तरह का सिलसिला चल रहा है लेकिन अभी तक मुख्य अपराधी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
श्री गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस पर संज्ञान लेना चाहिए और पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत देनी चाहिए कि इन धमकियों के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए ताकि जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा फिर से बहाल हो सके।
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