बैतूल , अगस्त 24 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन शासकीय तंत्र की उदासीनता और पर्याप्त सहयोग के अभाव में प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इसका ताजा उदाहरण 65वीं राष्ट्रीय सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में सामने आया है। पिछले वर्ष प्रदेश स्तर पर उपविजेता रही शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टिकारी की बालिका टीम इस बार प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सकी। इसके चलते बैतूल की जगह पिपरिया की टीम मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए दिल्ली में चल रही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहुंच गई।
पिछले वर्ष टिकारी स्कूल की बालिकाओं ने संभागीय प्रतियोगिता में पिपरिया की टीम को बड़े अंतर से हराया था। इसके बाद टिकारी की टीम राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंची और प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया। इस बार भी टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन पंजीयन नहीं हो पाने के कारण खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर समाप्त हो गया।
सुब्रतो कप देश की प्रतिष्ठित स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिताओं में शामिल है। इसमें सब-जूनियर बालक अंडर-15, जूनियर बालक अंडर-17 और जूनियर बालिका अंडर-17 वर्ग में टीमें हिस्सा लेती हैं। प्रतियोगिता में एक टीम के सभी खिलाड़ियों का एक ही स्कूल का विद्यार्थी होना अनिवार्य है। ब्लॉक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक वही टीम आगे बढ़ती है और दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों को शामिल करने की अनुमति नहीं होती।
प्रतियोगिता के लिए स्कूलों का ऑनलाइन पंजीयन सुब्रतो कप की वेबसाइट पर किया जाता है। ब्लॉक स्तरीय मुकाबले सामान्यतः जून के पहले और दूसरे सप्ताह, संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह तथा राज्य स्तरीय मुकाबले जुलाई के अंतिम और अगस्त के पहले सप्ताह में आयोजित होते हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता अगस्त में दिल्ली में होती है।
पिछले वर्ष जिले से सब-जूनियर बालक वर्ग में शासकीय माध्यमिक शाला टेमनी और जूनियर बालिका वर्ग में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टिकारी की टीम जिला स्तर पर विजेता रही थी। टेमनी की टीम संभाग स्तर पर उपविजेता रहकर बाहर हो गई थी, जबकि टिकारी की बालिका टीम ने संभागीय प्रतियोगिता जीतकर राज्य स्तर पर नर्मदापुरम संभाग का प्रतिनिधित्व किया था।
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के फाइनल में टिकारी की टीम मंडला संभाग से हारकर प्रदेश में उपविजेता रही थी। इस बार मंडला की वह टीम भी प्रतियोगिता में शामिल नहीं हुई। वहीं पिछले वर्ष टिकारी से बड़े अंतर से हारने वाली पिपरिया की टीम ने इस बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
टिकारी स्कूल की टीम पिछले वर्ष के बाद भी लगातार अभ्यास कर रही थी। टीम के कोच कृष्णकांत उईके के अनुसार इस वर्ष टीम के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की अच्छी संभावना थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण टीम का पंजीयन नहीं हो सका। आर्थिक संसाधनों और अपेक्षित जनसहयोग की व्यवस्था भी नहीं हो पाई।
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर विभिन्न योजनाएं और प्रतियोगिताएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन समय पर स्कूल स्तर पर टीमों का पंजीयन और प्रतियोगिताओं में भागीदारी सुनिश्चित नहीं होने से प्रतिभावान खिलाड़ियों को अवसर नहीं मिल पाता। टिकारी की टीम का प्रतियोगिता से बाहर रहना इसी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
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