नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु में चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 'लॉजिकल गड़बड़ी' श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के सत्यापन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि लगभग 1.16 करोड़ लोग जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में थे, उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों ने लॉजिकल गड़बड़ियों का हवाला देते हुए और सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए थे। पीठ ने तमिलनाडु के लिए भी वही निर्देश जारी किए जो पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में अदालत ने दिए थे।

इन निर्देशों के तहत, 'लॉजिकल गड़बड़ी' श्रेणी में आने वाले लोगों के नाम ग्राम पंचायत भवनों और तालुका स्तर पर अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दिखाए जाएंगे। सूची में हर मामले में गड़बड़ी के संक्षिप्त कारण भी बताए जाने चाहिए।

अदालत ने प्रभावित लोगों को 10 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से अपने दस्तावेज या आपत्तियां जमा करने की अनुमति दी। ऐसे दस्तावेज या आपत्तियां बूथ-स्तर के अधिकारी (बीएलओ) के सामने जमा करनी होंगी।

पीठ ने आगे निर्देश दिया कि ईसीआई और राज्य चुनाव कार्यालय को बीएलओ या उप-विभागीय स्तर के कार्यालयों में तैनाती के लिए पर्याप्त कर्मचारी प्रदान की जाए।

जिला कलेक्टरों को एसआईआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करने का निर्देश दिया गया।

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