नयी दिल्ली , फरवरी 11 -- उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पदनाम के लिए नयी नियमावली, "उच्चतम न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के पदनाम हेतु दिशा निर्देश 2026"अधिसूचित कर दी जो 2023 के पुराने नियमों का स्थान लेंगी।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में 10 फरवरी को हुई 'फुल कोर्ट मीटिंग' में इन नियमों को मंजूरी दी गई।

नये दिशानिर्देश के तहत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन की पूरी प्रक्रिया एक स्थायी समिति की देखरेख में होगी। समिति में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होंगे। पात्रता के लिए उम्मीदवार के पास अधिवक्ता के रूप में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। इसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश या ट्रिब्यूनल सदस्य के रूप में बिताया गया समय भी जोड़ा जा सकेगा।

नियमावली में आवेदक की न्यूनतम आयु 45 वर्ष निर्धारित की गई है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में 'फुल कोर्ट' इस सीमा में ढील दे सकता है। उम्मीदवार का मुख्य रूप से उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करना आवश्यक है , हालांकि डोमेन विशेषज्ञता रखने वाले और विशेष ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को उच्चतम न्यायालय में उपस्थिति की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है।

उच्चतम न्यायालय का सचिवालय आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन के लिए नोटिस जारी करेगा, जिसके लिए कम से कम 21 दिनों का समय दिया जाएगा। यदि किसी वकील का आवेदन पिछले दो वर्षों के भीतर उच्चतम या उच्च न्यायालय से खारिज किया जा चुका है, तो वह दोबारा आवेदन के लिए पात्र नहीं होगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित