नयी दिल्ली , जून 18 -- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी स्टेट बार काउंसिलों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी किए। इस याचिका में फर्जी वकीलों की पहचान करने और उन्हें पंजिका से बाहर करने के लिए एक देशव्यापी 'अधिवक्ता सत्यापन तंत्र' स्थापित करने के साथ-साथ वकीलों के लिए एक सोशल मीडिया आचरण संहिता बनाने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की और नोटिस जारी का आदेश दिया।

याचिका में वकीलों और एलएलबी की डिग्रियों के देशव्यापी सत्यापन की सुविधा के लिए 'नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री फॉर द लीगल प्रोफेशन ऑफ इंडिया' ( राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री) का गठन करने, और इसके साथ ही इस पेशे के सदस्यों के लिए एक सोशल मीडिया और डिजिटल आचरण संहिता तैयार करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नेशनल डिजिटल रजिस्ट्री बनाने के प्रस्ताव को एक अभिनव विचार बताया जिसे प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान बार के युवा सदस्यों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि कानूनी पेशे के सामने आने वाली कई चुनौतियों का समाधान यह सुनिश्चित करके किया जा सकता है कि युवा वकीलों को एक सुरक्षित और सहायक पेशेवर माहौल मिले।

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