नयी दिल्ली , अक्टूबर 9 -- उच्चतम न्यायालय ने पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन पेटा इंडिया को बड़ा झटका देते हुए गुरूवार को कोल्हापुर जिले के नंदनी मठ से हथिनी 'माधुरी' को जामनगर स्थित 'वंतारा' परियोजना में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायालय ने याचिका निरस्त करते हुए संगठन पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और आदेश दिया कि जुर्माने की इस राशि का उपयोग हथिनी माधुरी के उपचार के लिए किया जाए। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ के इस फैसले के बाद से स्पष्ट हो गया है कि माधुरी हथिनी अब नंदनी मठ में ही रहेगी।

पेटा इंडिया ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दावा किया था कि माधुरी हथिनी को नंदनी मठ वापस लाए जाने के बाद उसे दोबारा जंजीरों में बांधकर अकेलेपन में रखा जा रहा है, जिससे उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पेटा ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए माधुरी को वापस गुजरात के जामनगर स्थित 'वंतारा' हाथी पुनर्वास केंद्र भेजने का अनुरोध किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने पेटा के रुख की कड़ी आलोचना की और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया। नंदनी मठ के अधिवक्ता मनोज पाटिल ने अदालत के इस निर्णय की पुष्टि की।

गौरतलब है कि माधुरी हथिनी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से नंदनी स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में रह रही है। ऑस्टियोआर्थराइटिस और पैरों की बीमारियों सहित उसके गिरते स्वास्थ्य की चिंताओं के कारण अगस्त 2025 में उसे जामनगर के वंतारा केंद्र में स्थानांतरित किया गया था।

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