नयी दिल्ली , जनवरी 07 -- उच्चतम न्यायालय ने 2023 की जातीय हिंसा में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को कथित तौर पर फंसाने वाली पूरी 48 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ ही उनके वॉयस सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी(एनएफएसयू), गांधीनगर को भेजे जाने के बुधवार को आदेश दिए।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की अदालत की निगरानी में जांच की मांग को लेकर पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। पीठ ने एनएफएसयू को फोरेंसिक विश्लेषण में तेजी लाने और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में इस न्यायालय को सौंपने का भी निर्देश दिया।
इससे पहले नवंबर 2025 में एनएफएसयू ने शीर्ष न्यायालय को सूचित किया था कि उसे पहले भेजे गए ऑडियो क्लिप में छेड़छाड़ के संकेत थे और वे वैज्ञानिक रूप से आवाज की तुलना के लिए उपयुक्त नहीं थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मणिपुर पुलिस ने फोरेंसिक लैब को पूरी रिकॉर्डिंग के बजाय केवल छोटे, संपादित क्लिप भेजे थे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मामला लगभग दस बार सूचीबद्ध किया गया था और हर बार सरकारी वकील पेश हुए थे। उन्होंने तर्क दिया कि याचिका में ही पूरी 48 मिनट की बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट शामिल है और ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई गई थी।
राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पूरी रिकॉर्डिंग पिछली सुनवाई के बाद ही मिली थी और पहले औपचारिक रूप से नहीं दी गई थी।
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