नयी दिल्ली , अक्टूबर 16 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के उस फैसले पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें यह कहा गया है कि हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे किसी धर्म को अपनाने वाला व्यक्ति, अपनी पुरानी हिंदू जाति के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
माकपा ने यहां जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह फैसला धर्मांतरित लोगों को आरक्षण लाभ से वंचित करता है और ऐसा करना संविधान में बताए गए समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों के लिए एक गंभीर झटका है। सामाजिक न्याय का धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और शिक्षा, रोजगार व आर्थिक अवसरों तक पहुंच में असमानताओं के आधार पर होना चाहिए। माकपा ने कहा कि मजहब बदलने से न तो जातिगत भेदभाव खत्म होता है और न ही उससे जुड़ा सामाजिक व आर्थिक पिछड़ापन दूर होता है। ।
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