मुंबई , जुलाई 07 -- रपाष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा-एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने मंगलवार को उन अफवाहों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और भाजपा के राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े के बीच कोई समझौता होने जा रहा है जिसके तहत राकांपा केंद्र के साथ-साथ महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) नीत गठबंधन को समर्थन देगी।
श्रीमती सुले ने यहां पत्रकारों से कहा, "मुझे श्री पाटिल और श्री तावड़े के बीच ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। मुझे भी इस बारे में सिर्फ मीडिया के लोगों से ही पता चला है। वैसे श्री तावड़े और मेरी अक्सर मुलाकात होती रहती है।"यह पूछे जाने पर कि क्या श्री शरद पवार की राजग को समर्थन देने या उसमें शामिल होने की कोई योजना है, उन्होंने कहा, "मैं पिछले 12 वर्षों से ऐसी चर्चाएं सुन रही हूं। मुझे श्री पाटिल और श्री तावड़े के बीच ऐसी किसी बैठक के बारे में कुछ नहीं पता। श्री तावड़े और मैं कई बार मिले हैं, क्योंकि हम दोनों संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में हैं। पिछले एक महीने में ही हमारी कम से कम 21 बार मुलाकात हुई होगी। इसलिए जो बातें चल रही हैं, उन्हें सुनकर मुझे सिर्फ हंसी आ रही है।"राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार ने भी इन अटकलों से इनकार किया और कहा कि किसी भी नेता के साथ ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "एक विपक्षी दल के रूप में हम आम जनता, किसानों, छात्रों और मजदूरों के मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे।"इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, "यह तो तय है कि ऐसी बातचीत चल रही है। अब उन्हें खुद फैसला करना है कि उनके लिए कौन सा रास्ता सही है। वे विचारधारा चाहते हैं या राजनीतिक सत्ता? क्या वे सिर्फ पावर चाहते हैं या फिर छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहब आंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले के विचारों पर चलते हुए प्रगतिशील महाराष्ट्र के विकास को आगे बढ़ाना चाहते हैं? या फिर वे पैसे, दौलत और ताकत के दम पर काम करना चाहते हैं?"सूत्रों के मुताबिक शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने शुक्रवार को भाजपा के राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े से मुलाकात की थी, जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि अगर श्री शरद पवार की पार्टी भाजपा नीत गठबंधन में शामिल होती है, तो राकांपा को क्या राजनीतिक फायदे मिल सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि श्री शरद पवार की राकांपा के पास या तो राजग का हिस्सा बनने का विकल्प है या फिर वह उसे बाहर से समर्थन दे सकती है। इस बैठक में सरकार में शामिल होने को लेकर भी बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि श्री शरद पवार की राकांपा को भाजपा नीत गठबंधन में शामिल करने के प्रयास केंद्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं, न कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के स्तर पर।
सूत्रों के अनुसार, अगर श्री शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा राजग में शामिल होती है, तो उसे केंद्र सरकार में एक कैबिनेट मंत्री का पद और महाराष्ट्र सरकार में तीन कैबिनेट मंत्री पद मिलने की संभावना है।
सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र में मिलने वाले इन विभागों में से एक वित्त मंत्रालय हो सकता है, जिसे काफी अहम माना जाता है और फिलहाल यह खुद मुख्यमंत्री फडणवीस के पास है। राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार पहले ही इस वित्त विभाग पर अपना दावा ठोक चुकी हैं, जो कभी उनके दिवंगत पति अजीत पवार के पास हुआ करता था।
जानकारों का मानना है कि वित्त मंत्रालय को संभवतः शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है और शायद यही वजह है कि यह विभाग अब तक उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार समेत किसी भी अन्य नेता को नहीं सौंपा गया है।
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