सुपौल , जनवरी 19 -- सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) 45वीं वाहिनी, बीरपुर ने केंद्रीय विद्यालय, बीरपुर में 'वंदे मातरम' की 150वीं स्मृति दिवस समारोह (चरण-II) का आयोजन किया।

कार्यक्रम का आयोजन वाहिनी के समादेष्टा गौरव सिंह के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम मेंएसएसबी के अधिकारीगण, अधीनस्थ अधिकारी, जवान, केंद्रीय विद्यालय, 45 वीं वाहिनी बीरपुर के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारी एवं जवानों ने राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम्" का सामूहिक गायन सम्मानपूर्वक किया। इसके बाद समादेष्टा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम्" की रचना, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि "वंदे मातरम्" भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसकी रचना श्री बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा सात नवम्बर, 1875 को की गई थी। यह गीत उनके राष्ट्रवादी उपन्यास "आनंद मठ" (प्रकाशन वर्ष 1882) में प्रकाशित हुआ, जो 1775 के संन्यासी विद्रोह पर आधारित है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत राष्ट्रवाद की भावना एवं औपनिवेशिक शासन के विरोध का सशक्त प्रतीक बना। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसका प्रथम सार्वजनिक गायन किया गया।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगान एवं राष्ट्रीय गीत, दोनों को समान सम्मान प्रदान किया गया।

वर्तमान में राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" के सामूहिक गायन एवं इसके प्रचार-प्रसार के लिये देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनकी श्रृंखला में यह समारोह भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

इस अवसर पर नरेश कुमार, समादेष्टा (मेडिकल), जगदीश कुमार शर्मा, द्वितीय कमान अधिकारी, उप समादेष्टा प्रवीण कुमार कौशिक, सुमन सौरभ सहित अन्य अधिकारीगण, जवान, विद्यालय के छात्र-छात्राएँ एवं शिक्षकगण उपस्थित थे।

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