गिरिडीह , सितम्बर 06 -- झारखंड सरकार नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री और गिरिडीह विधायक स्वर्गीय सुदिव्य कुमार को रविवार को यहां नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।
गिरिडीह के हरसिंहरायडीह श्मशान घाट पर उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके 12 वर्षीय पुत्र हर्ष ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं, समर्थकों और हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री उस स्थल पर पहुंचे जहां दिवंगत मंत्री का पार्थिव शरीर रखा गया था। यहां सीएम ने पुष्प अर्पित की। इस दौरान सीएम की पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने भी पुष्प अर्पित किए। पार्थिव शरीर को देखकर सीएम हेमंत के साथ कल्पना भी भावुक हो गईं।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के आवास पर पहुंचे। यहां पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया। नमन करने के बाद राज्यपाल ने दुख व्यक्त किया।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्र नाथ महतो, मंत्री संजय यादव, मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री हफिजूल अंसारी, मंत्री दीपिका पाण्डेय, सांसद नलीन सोरेन, टुंडी विधायक मथुरा महतो, सारठ विधायक चुन्ना सिंह, मंत्री राधाकृष्णा किशोर के अलावा मंत्री योगेंद्र महतो, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, झारखंड सरकार की अपर सचिव वंदना दादेल, पर्यटन सचिव नमन प्रियेश लकड़ा भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुदिव्य कुमार ने 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीति यात्रा की शुरुआत की थी। दिशोम गुरू शिबू सोरेन के साथ वह झारखंड आंदोलन में शामिल रहे और उनपर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे।
श्री कुमार 1990 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के गिरिडीह नगर अध्यक्ष बने, 2000 में जिला अध्यक्ष, 2006 में गिरिडीह जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष बने। वह 2009 में गिरिडीह विधानसभा का पहला और 2014 में दूसरा चुनाव लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह से वह विधायक बने। 2024 में दूसरी बार गिरिडीह का विधायक बने, फिर झारखंड सरकार में नगर विकास, आवास, पर्यटन, युवा कार्य एवं कला संस्कृति , तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री मंत्री बने।
झारखंड को पर्यटन के क्षेत्र में देश के मानचित्र पर स्थापित करने का उनका सपना था। झारखंड को माइनिंग टूरिज्म बनाने का उनका लक्ष्य था। गिरिडीह में यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, इंजिनियरिंग कॉलेज, नये रूप में महिला महाविद्यालय, चिड़ियाघर, बायोडायवर्सिटी पार्क, लाइब्रेरी, जेसी बोस सीएम एक्सीलेंस स्कूल, पचम्बा सीएम एक्सीलेंस स्कूल, सीएम एक्सीलेंस स्कूल कस्तूरबा गांधी बालिका गिरिडीह, 50 हजार लीटर प्रतिदिन का मेधा डेयरी परियोजना, फोरलेन निर्माण , बायपास सड़क की स्वीकृति, पीरटांड़ में मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना, झारखंड का गिरिडीह पहला सोलर सिटी बना , उसरी नदी के किनारे शास्त्री नगर से अरगाघाट तक मेरिन ड्राइव, खंडोली और वाटर फाल का सौन्दर्यीकरण सहित कई जनहित की योजनाओं को धरातल पर उनके द्वारा उतारा गया।
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