मुंबई , सितंबर 15 -- वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के युवा नेता सुजात आंबेडकर ने आरोप लगाया है कि वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में पढ़ाई और छात्रावास से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर विरोध कर रहे दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों को दूर करने की बजाय उनके खिलाफ 'दमनकारी' कार्रवाई की जा रही है।
श्री आंबेडकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और उनमें से कुछ को उनके छात्रावास से निकाल दिया गया है।
उन्होंने इस कार्रवाई को 'ब्राह्मणवादी और मनुस्मृति-आधारित सोच' का नतीजा बताया और राज्य सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की।
श्री आंबेडकर के अनुसार छात्र दो महीने से अधिक समय से कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें बेहतर मेस सुविधा, साफ और सुरक्षित पीने का पानी, 24 घंटे खुले रहने वाले पुस्तकालय, रुकी हुई पीएचडी दाखिला प्रक्रिया को पूरा करना, अकादमिक विभागों को फिर से शुरू करना और प्रशासनिक लापरवाही को खत्म करना शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों से बातचीत करने और उनकी शिकायतों को दूर करने की बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई करने का रास्ता अपनाया। वीबीए नेता ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को सम्मान के साथ शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित करने के लिए जाति का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि परिसर में दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
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