हमीरपुर , अगस्त 15 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को हमीरपुर में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला साइंस कॉलेज को खोलने की घोषणा की।

श्री सुक्खू ने यहां के सरकारी कॉलेज में सालाना पुरस्कार वितरण समारोह में कहा कि कॉलेज के लिए 80 कनाल ज़मीन पहले ही तय कर ली गयी है और इस परियोजना के लिये 20 करोड़ रुपये जारी कर दिये गये हैं। उन्होंने हमीरपुर में एक एलाइड एंड हेल्थकेयर (पेशेवर और विज्ञान हैं जो बीमारियों के निदान, उपचार, और मरीजों की देखभाल में डॉक्टरों और नर्सों की सहायता करते हैं) कॉलेज खोलने की भी घोषणा की। इसके अलावा ज़िले में 74 एकड़ ज़मीन पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के स्तर का एक आयुर्वेदिक संस्थान बनाया जायेगा।

उन्होंने इस मौके पर अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा को 'राज्य की पर्यटन राजधानी' का दर्जा दिया गया है, जबकि हमीरपुर हिमाचल प्रदेश की 'शिक्षा राजधानी' है। हमीरपुर के छात्र पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देना राज्य सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है और सरकार सिस्टम में सुधार के ज़रिए इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।

श्री सुक्खू ने कहा कि 2021 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्ववर्ती सरकार के समय जब राज्य में 'डबल-इंजन सरकार' थी, तब अच्छी शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान पर था। मौजूदा कांग्रेस सरकार द्वारा किये गये सुधारों के बाद राज्य ने अब अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन गांवों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए।"उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों के पास अच्छी शिक्षा देने के लिए 156 से ज़्यादा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) विद्यालय खोले हैं। इन स्कूलों के खुलने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में 24,000 की बढ़ोतरी हुई है और इनके कामकाज और बुनियादी ढांचे के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए नये पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं और 1,000 से ज़्यादा युवाओं को मानवीय आधार पर नौकरियां दी गयी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी को दूर करने की योजना पर काम कर रही है। साथ ही, उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए कॉलेजों का युक्तिकरण भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर देने के लिए लगातार कोशिश कर रही है और राज्य चयन आयोग तथा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भर्ती परीक्षा का एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बीजेपी सरकार के समय प्रश्न पत्र लीक हुए थे, जिसमें पुलिस भर्ती प्रक्रिया भी शामिल थी और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां भी हुई थीं। कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद आयोग को बंद कर दिया गया और भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में शामिल लोगों को जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और योग्यता-आधारित भर्ती सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कई भर्तियों के लिए अनिवार्य साक्षात्कार प्रणाली को खत्म कर दिया है और योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया शुरू की है।

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के ज़रिए भर्ती अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के नंबरों के आधार पर होती है, जबकि पहले साक्षात्कार पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य सरकार की एक और बड़ी प्राथमिकता है। बीमारियों का शुरुआती स्टेज में ही पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। राज्य में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गयी है, जिसमें मरीज़ों को 30,000 रुपये का खर्च आता है और राज्य सरकार 90,000 रुपये की सब्सिडी देती है। इसके अलावा, बीमारियों की ज़्यादा सटीक जांच के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में 3-टेस्ला एमआरई मशीनें लगाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि कई छात्र संगठनों के नेताओं ने उनसे मुलाक़ात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक सफ़र भी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) से शुरू हुआ था और अब वह मुख्यमंत्री के तौर पर लोगों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में आना हमेशा से उनका लक्ष्य रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि हर बार सफलता नहीं मिलती, लेकिन नाकामियों को सीखने और सफलता की राह खोजने के मौक़े के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा 422 एमडब्ल्यू के किशाऊ मल्टीपर्पज़ परियोजना पर किए गये उस समझौते को रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश को बिजली उत्पादन की लागत का एक बड़ा हिस्सा उठाना पड़ता। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर उनके मज़बूत रुख़ की वजह से ही हिमाचल प्रदेश को अब बिना कोई वित्तीय निवेश किए सालाना लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर तभी आगे बढ़ेगा जब पड़ोसी राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में अगली सुनवाई से पहले भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के बकाया का अपना हिस्सा हिमाचल प्रदेश को चुकाने के बारे में हलफ़नामा दाखिल करेगी।

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