सुकमा , अक्टूबर 12 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीणों को वन भूमि पर अधिकार दिलाने की दिशा में जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने 195 व्यक्तिगत वनाधिकार प्रकरणों को स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही कोंटा विकासखंड के चार गांवों के लिए 4763.658 हेक्टेयर सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।

जिला प्रशासन से आज मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर अमित कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कोंटा उपखंड से प्राप्त 332 व्यक्तिगत वनाधिकार दावों की समीक्षा की गई। परीक्षण के बाद समिति ने सर्वसम्मति से 195 प्रकरणों को स्वीकृति देते हुए संबंधित ग्रामीणों को वनाधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया।

समिति ने शेष 132 राजस्व वन प्रकरणों में जीपीएस के माध्यम से अक्षांश एवं देशांतर के आधार पर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र अधिकार पत्र जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, परीक्षण के दौरान निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं पाए गए पांच प्रकरणों को निरस्त कर दिया गया। इनमें काबिल कास्त, चट्टान मद और दोहरे दावों से संबंधित प्रकरण शामिल हैं।

बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के चार प्रकरणों को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत ग्राम अरलमपल्ली को 1728.670 हेक्टेयर, जग्गावरम को 1527.106 हेक्टेयर, केरलापेन्दा को 1402.482 हेक्टेयर तथा पुनपल्ली को 105.400 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लिए सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया।

जिला प्रशासन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में निवासरत जनजातीय समुदायों के पारंपरिक वन अधिकारों को सुरक्षित करना तथा वन संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से नियद नेल्लानार क्षेत्र के ग्रामीणों को वनाधिकार संबंधी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुन्द ठाकुर, सहायक आयुक्त हेमंत सिन्हा, जिला पंचायत सदस्य हुंगाराम मरकाम, माड़े बारसे और कोरसा सन्नू सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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