सुकमा , मई 16 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल पुनर्वास से जुड़े व्यक्तियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहयोग को सशक्त बनाने हेतु "अंतर्यात्रा" पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

इस पहल में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, साम्या भूमि फाउंडेशन एवं यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से पुनर्वास प्रक्रिया को केवल आर्थिक या प्रशासनिक सहायता तक सीमित न रखते हुए मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पुनर्निर्माण से जोड़ा गया है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन कलेक्टर अमित कुमार एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि पीपीआईए फेलो अर्कजा कुठियाला और मनोवैज्ञानिक एवं जिला सलाहकार मानसिक स्वास्थ्य श्री नितिन कुमार के निर्देशन में कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

14 एवं 15 मई को नक्सल पुनर्वास केंद्र में आयोजित दो दिवसीय गतिविधियों में 25 प्रतिभागियों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए। पहले दिन सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों के बीच विश्वास, संवाद और आत्मीयता का वातावरण तैयार किया गया। प्रतिभागियों ने अपने घर, समुदाय और जीवन से जुड़ी यादों को साझा करते हुए पारंपरिक गीतों व सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से अपनी भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त किया, जिससे उन्हें आत्मविश्वास और मानसिक संबल मिला।

दूसरे दिन महिला प्रतिभागियों के साथ केंद्रित समूह चर्चा (एफजीडी) आयोजित कर पुनर्वापसी, समाज में स्वीकार्यता तथा भविष्य की चुनौतियों पर संवेदनशील संवाद किया गया। रोल-प्ले एवं संवाद आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी आशाओं, भविष्य की योजनाओं और शांतिपूर्ण जीवन की आकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने का अवसर मिला। "अंतर्यात्रा" पहल कठोर औपचारिक प्रक्रियाओं के बजाय व्यक्तिगत अनुभवों और कहानियों को प्राथमिकता देकर वास्तविक भावनात्मक चुनौतियों को समझने और समाधान की दिशा में ठोस प्रयास कर रही है, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया अधिक मानवीय, प्रभावी और आत्मविश्वासपूर्ण भविष्य निर्माण की ओर अग्रसर हो रही है।

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