सुकमा , जनवरी 21 -- छत्तीसगढ़ में बैलाडीला की खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क के अपशिष्ट को एक बार फिर से सुकमा शहर में डंप करने की तैयारी चल रही है। पिछले वर्ष स्थानीय विरोध के बाद रोके गए इस कार्य के लिए ठेकेदार की पोकलेन मशीनें और हाइवा वाहन प्रस्तावित डंपिंग यार्ड में पहुंचने लगे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह डंपिंग स्थल शबरी नदी से मात्र 150 मीटर की दूरी पर है, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। एनजीटी के मानदंडों के अनुसार नदियों व जल स्रोतों के आस-पास खनन अपशिष्ट डंप करना प्रतिबंधित है। इस क्षेत्र के आसपास कृषि योग्य भूमि भी है, जिससे मिट्टी और जल प्रदूषण का खतरा पैदा हो गया है।

इसके अतिरिक्त, इस कार्य के लिए सुकमा नगर पालिका से कोई अनुमति नहीं ली गई है। नगर पालिका के मुख्य नगर कार्यपालन अधिकारी पी.आर. कोर्राम ने पुष्टि की कि टेलिंग्स डंप करने के लिए नगरपालिका से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। नगरीय क्षेत्र में बिना अनुमति यह कार्य नियमविरूद्ध है। खनिज विभाग के सूत्रों का कहना है कि आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड के ठेकेदार ने नया पर्यावरणीय अनुमति भी प्राप्त नहीं की है और पुराने आदेश के आधार पर डंपिंग करने की तैयारी है।

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