जगदलपुर , मार्च 25 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिला निवासी पापाराव उर्फ मंगू के आत्मसमर्पण करते ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने राहत की सांस ली है। 28 सालों तक प्रतिबंधित नक्सली संगठन में काम करते हुए पापाराव ने 48 अपराधों को अंजाम दिया था।
पापाराव पर सुकमा में 24 अपराध, दंतेवाड़ा में सात अपराध और बीजापुर में 17 अपराध करने का आरोप है। पुलिस को 41 स्थायी वारंटों के जरिए उसी तलाश रही थी। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के कारण यह संभव हुआ कि स्पेशल जोनल कमेटी के इस वांछित नक्सली ने 17 साथियों के साथ बुधवार को बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज के समक्ष हथियार डाल दिए। 11 पुरुष और 07 महिला नक्सलियों से पुलिस को कुल 18 हथियार मिले हैं।
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के इंचार्ज पापाराव और उसकी टीम एके 47, इंसास,एसएलआर राइफल्स,बीजीएल लॉन्चर और 12 लाख रुपयों के साथ मुख्य धारा में आया है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को बस्तर में मोस्ट वांटेड माओवादी कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति और विकास की पहल के कारण भटके हुए युवाओं का भरोसा बढ़ा है और वे मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है और बस्तर में बंदूक की जगह विकास की आवाज गूंज रही है।
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्यभवन पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आयोजित "पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन" कार्यक्रम के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़ा कुख्यात माओवादी कमांडर पापाराव उर्फ अशोक उर्फ सुन्नम चन्द्रैया उर्फ मंगु ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। पापाराव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह माओवादी संगठन के दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का प्रभारी रह चुका था। लंबे समय तक दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय रहे इस माओवादी कमांडर का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार पापाराव वर्ष 1997 में माओवादी संगठन से जुड़ा था और शुरुआती दौर में उसने संगठन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2004 में वह पामेड़-उसूर एरिया कमेटी का प्रभारी बना। इसके बाद संगठन में उसकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई और वर्ष 2018 से उसे पश्चिम बस्तर संभाग का प्रभारी बनाया गया। बाद में उसे संगठन के दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का इंचार्ज नियुक्त किया गया, जो माओवादी संरचना में महत्वपूर्ण पद माना जाता है। इस दौरान वह एके-47 रायफल जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर नक्सली गतिविधियों का संचालन करता रहा।
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार पापाराव के खिलाफ बीजापुर जिले के विभिन्न थानों में कुल 48 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा उसके विरुद्ध 41 स्थायी वारंट लंबित बताए गए हैं। उसके खिलाफ जिला सुकमा में 24 तथा दंतेवाड़ा जिले में सात गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण वह सुरक्षा बलों की प्राथमिक सूची में शामिल रहा और उसके सिर पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पापाराव का संगठन में प्रभाव काफी व्यापक था और वह दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। उसके नेतृत्व में माओवादी संगठन ने कई इलाकों में अपनी गतिविधियां संचालित की थीं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक क्षमता को बड़ा झटका लगा है और इससे क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क कमजोर होगा।
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