सुकमा , जून 02 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवक-युवतियां अब सामान्य जीवन की ओर लौटते हुए शिक्षा, कौशल विकास और खेल गतिविधियों के माध्यम से नई शुरुआत कर रहे हैं।
पुनर्वास केंद्र में रह रहे 42 महिलाओं और 71 पुरुषों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहे ये युवा अब अनुशासित दिनचर्या के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं। केंद्र परिसर में युवाओं द्वारा लगाए गए 'भारत माता की जय' के उद्घोष क्षेत्र में शांति और विश्वास की नई कहानी बयां कर रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार युवाओं के बौद्धिक विकास के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो उन्हें अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। साथ ही आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण भी संचालित किए जा रहे हैं। पुनर्वासित युवाओं के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज भी प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराए जा रहे हैं।
पुनर्वास केंद्र में खेल गतिविधियों को विशेष महत्व दिया गया है। युवाओं की रुचि को देखते हुए वॉलीबॉल प्रतियोगिता शुरू की गई है, जिसमें युवक और युवतियां उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि खेल गतिविधियां युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने में मददगार साबित हो रही हैं।
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