रांची , मार्च 11 -- झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के हिंदी विभाग की ओर से 12और 13 मार्च को "भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति साहित्य" विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
यह संगोष्ठी विश्वविद्यालय के चेरी-मनातू परिसर, कांके (रांची) में आयोजित होगी। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा की दार्शनिक पृष्ठभूमि, भक्ति आंदोलन की सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका तथा भक्ति साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है।
संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान, शोधार्थी और विद्यार्थी भाग लेंगे। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, भक्ति आंदोलन, निर्गुण-सगुण भक्ति, लोकज्ञान, नारी चेतना, सूफी-भक्ति संवाद और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. उपेन्द्र कुमार 'सत्यार्थी' ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भक्ति साहित्य हमारे सांस्कृतिक और बौद्धिक इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। यह संगोष्ठी इस परंपरा के दार्शनिक, सामाजिक और साहित्यिक आयामों को समकालीन संदर्भों में समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के विद्वानों की भागीदारी से यह आयोजन सार्थक अकादमिक संवाद को आगे बढ़ाएगा।
संगोष्ठी के अध्यक्ष व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रत्नेश विष्वक्सेन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा संवाद और प्रश्नोत्तर की परंपरा रही है। जिज्ञासा और उत्तर की खोज ही इसके विस्तार के प्रमुख आधार रहे हैं। यह संगोष्ठी उसी संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में श्रीलंका, थाइलैंड, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और नेपाल के विद्वान भाग लेंगे। वहीं देश के काशी हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, कालीकट विश्वविद्यालय, रांची विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग 20 विषय-विशेषज्ञ शामिल होंगे। संगोष्ठी में देश-विदेश से चयनित 101 प्रतिभागी अपने शोध-आलेख प्रस्तुत करेंगे।
कार्यक्रम के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें डॉ. एम. शिवकुमार द्वारा कबीर गायन प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं हिंदी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रसिद्ध नाटक 'अंधेर नगरी' का मंचन भी किया जाएगा। इस अवसर पर हिंदी विभाग द्वारा प्रकाशित 'स्मारिका-2026' का विमोचन भी किया जाएगा। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. उपेन्द्र सत्यार्थी ने बताया कि इस आयोजन में प्रस्तुत और चयनित उत्कृष्ट शोध-आलेखों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की भी योजना है।
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