नयी दिल्ली , नवंबर 18 -- रेलवे सीमेंट की ढुलाई की लागत करने के लिए नीति बना रहा है जिसके वास्ते विशेष टैंक कंटेनरों का निर्माण कर थोक सीमेंट की ढुलाई को युक्तिसंगत बनाया जाएगा और इन कैंटेनरों के जरिए सीमेंट को कम लागत पर निर्माण स्थल पर पहुंचाना आसान हो सकेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी देते हुए बताया "सीमेंट की ढुलाई के लिए भारतीय रेल की 'टैंक कंटेनर आधारित बल्क सीमेंट परिवहन नीति' से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी तथा माल ढुलाई और भी आसान होगी।"रेलवे ने उम्मीद जताई है कि इससे माल ढुलाई में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इन कैंटेनरों के जरिए हर साल अतिरिक्त दस लाख टन सीमेंट की ढुलाई की जा सकेगी। सीमेंट परिवहन के लिए इस नीति के तहत सीमेंट को कंटेनरों के माध्यम से सीधे निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जाएगा। सीमेंट ढुलाई का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा अब तक ट्रकों के जरिये होता है और इसमें रेलवे की हिस्सेदारी मात्र 35 प्रतिशत है। माना जा रहा है कि नयी नीति लागू होने से रेलवे की सीमेंट ढुलाई में बड़ी हिस्सेदारी होगी। इससे सीमेंट उद्योग को बेहतर लॉजिस्टिक सेवाएं प्रदान कर इसकी परिवहन लागत को कम किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से कंटेनरों से लोडिंग और अनलोडिंग का समय बचेगा। सीमेंट ढुलाई की इस नयी नीति से सीमेंट ढुलाई की लागत 15 प्रतिशत तक कम हो जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि यह नीति तैयार है और अब श्री वैष्णव को इसकी सिर्फ घोषणा करनी है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही इसकी घोषणा करने वाले हैं। इस पहल को सीमेंट उद्योग और निर्माण क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। अब तक सीमेंट फैक्टि्रयों से बोरियों में भरकर ट्रकों से भेजा जाता था जिससे सीमेंट ढुलाई करने में बहुत दिक्कत आती थी। सीमेंट ढुलाई की इस प्रक्रिया से धूल प्रदूषण, पैकेजिंग लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ जाता था लेकिन नयी नीति से उम्मीद है कि इसमें बड़ा बदलाव आएगा।
रेलवे का मानना है कि सीमेंट उद्योग तेजी से प्रगति कर रहा है और देश में वर्ष 2024-25 में 450 टन सीमेंट की ढुलाई है जिसके 2030 तक 600 टन तक पहुंचने की उम्मीद है। वर्तमान थोक सीमेंट खपत कुल सीमेंट उत्पादन का 17 प्रतिशत है जिसके 2030 तक 30 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।
हरित थोक सीमेंट परिवहन के लिए रेलवे समर्पित टर्मिनलों के साथ विशेष प्रयोजन वैगन तैयार कर रहा है। इसमें विशेष कंटेनरों की बड़ी भूमिका होगी और सीमेंट ढुलाई की दर तर्कसंगत हो सकेगी।
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